कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। राज्य में चल रही मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और चुनाव आयोग के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। इसी मुद्दे पर सोमवार (2 फरवरी 2026) को ममता बनर्जी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। बैठक के बाद ममता बनर्जी बेहद नाराज नजर आईं और उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कभी ऐसा घमंडी और झूठा मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं देखा।
ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। मैंने दिल्ली की राजनीति में लंबा समय बिताया है। मैं चार बार मंत्री और सात बार सांसद रही हूं। मैंने कभी ऐसा इलेक्शन कमिश्नर नहीं देखा जो इतना घमंडी हो, इतना झूठा हो। मैंने उनसे कहा कि मैं आपकी कुर्सी की इज्जत करती हूं क्योंकि कोई कुर्सी परमानेंट नहीं होती। एक दिन आपको भी जाना है।” उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है और बंगाल को टारगेट किया जा रहा है।
इस दौरान ममता बनर्जी ने एसआईआर की प्रक्रिया को पुरानी परंपराओं के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि 2022 में अगर एसआईआर होता और पिता के बर्थ सर्टिफिकेट मांगे जाते तो यह संभव नहीं होता क्योंकि पहले बच्चे घरों में पैदा होते थे, अस्पतालों में नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री का जिक्र करते हुए कहा, “अपने प्रधानमंत्री से पूछिए कि क्या उनके माता-पिता के इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी सर्टिफिकेट हैं।” उन्होंने नामों की स्पेलिंग में छोटी गलतियों या टाइटल बदलाव पर दावों को खारिज करने का आरोप लगाया, जो बंगाल में आम है।
हम आपको बता दें कि, यह विवाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक घमासान को बढ़ा रहा है। ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों से बातचीत कर आम सहमति बनाने की योजना बनाई है। यह मुद्दा न केवल मतदाता अधिकारों से जुड़ा है बल्कि चुनावी निष्पक्षता और लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और दावों की प्रक्रिया से स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच टकराव जारी है।
