नई दिल्ली अगर गमले के पौधे मुरझाए हुए लगते हैं या उनमें फूल-पत्तियां कम आ रही हैं तो बाजार से महंगी खाद खरीदने की जरूरत नहीं है। किचन में मौजूद दूध, हल्दी और हींग से घर पर ही नेचुरल खाद बनाई जा सकती है। यह नुस्खा पौधों को हरा-भरा और खिला-खिला बनाने में मदद करता है।दूध में ऐसे तत्व होते हैं जो मिट्टी को पोषण देते हैं और पौधे की जड़ों को मजबूत बनाते हैं। हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं, जो पौधों को कीड़े-मकोड़े और बीमारियों से बचाते हैं। हींग मिट्टी में मौजूद कुछ खराब कीड़ों को दूर भगाने का काम करती है। तीनों के मिश्रण से पौधों की सेहत के लिए असरदार खाद बन जाती है।
बताते चले कि, इसके लिए एक कप दूध (बचा हुआ या फटा हुआ भी चल सकता है), आधा टीस्पून हल्दी पाउडर, एक चुटकी हींग और दो कप पानी चाहिए। बर्तन में दूध लेकर हल्दी और हींग मिलाएं। अच्छे से घुलने के बाद दो कप पानी मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को पौधों की मिट्टी में हफ्ते में एक बार जड़ों के पास डालें। पत्तियों पर न डालें और एक बार में ज्यादा मात्रा न दें।यह नुस्खा गुलाब, गुड़हल, मोगरा, गेंदा जैसे फूल वाले पौधों के साथ तुलसी, मनी प्लांट और अन्य गमले के पौधों के लिए उपयोगी है। इससे नई पत्तियां और फूल जल्दी आने लगते हैं। दूध ताजा या हल्का बासी होना चाहिए। बहुत खराब दूध का इस्तेमाल न करें। हफ्ते में सिर्फ एक बार डालें, नहीं तो मिट्टी में फंगस लगने का खतरा बढ़ सकता है। असर दिखने में करीब दो-तीन हफ्ते लग सकते हैं।
दूध से पौधों को मिल सकते हैं पोषक तत्व
घरेलू पौधों की देखभाल में दूध का इस्तेमाल कुछ लोग मिट्टी में पोषण बढ़ाने के लिए करते हैं। दूध में कैल्शियम समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें पौधों के लिए उपयोगी माना जाता है। इस घरेलू नुस्खे में दूध को पानी के साथ मिलाकर मिट्टी में कम मात्रा में डालने की सलाह दी जाती है।
हालांकि दूध का इस्तेमाल करते समय मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बहुत अधिक दूध सीधे मिट्टी में डालने से दुर्गंध, सूक्ष्मजीवी गतिविधि या मिट्टी में अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए इसे गाढ़े रूप में डालने के बजाय पर्याप्त पानी के साथ पतला करके इस्तेमाल करने की बात कही जाती है।
हल्दी का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
हल्दी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख मसाला है। इसमें करक्यूमिन जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं और हल्दी में एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर शोध भी हुआ है। घरेलू बागवानी में कुछ लोग हल्दी को मिट्टी की देखभाल और पौधों से जुड़े फंगल या बैक्टीरियल जोखिम को कम करने के पारंपरिक उपाय के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
दूध और हल्दी के साथ इस घरेलू मिश्रण में एक चुटकी हींग भी डाली जाती है। हींग की तेज गंध के कारण इसे पारंपरिक घरेलू उपायों में कुछ कीटों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।लेकिन हींग को पौधों के कीट नियंत्रण का वैज्ञानिक या सार्वभौमिक समाधान नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग कीटों पर इसका प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए पौधे में कीट दिखाई देने पर पहले उसकी पहचान करना जरूरी है।
आखिर में बताते चले कि, दूध, हल्दी और हींग से बना मिश्रण घर पर पौधों की देखभाल के लिए कम लागत वाला प्रयोग हो सकता है। इसमें आसानी से उपलब्ध घरेलू सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है और इसे तैयार करना भी सरल है। लेकिन इसे पौधों के लिए जरूरी सभी पोषक तत्वों वाली पूर्ण खाद नहीं माना जाना चाहिए।पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी की गुणवत्ता, पर्याप्त रोशनी, संतुलित पोषण, उचित पानी और जल निकासी सभी जरूरी हैं। यदि पौधा गंभीर रूप से बीमार है या लगातार मुरझा रहा है, तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय समस्या की पहचान कर उचित पौध देखभाल उपाय अपनाना अधिक जरूरी है।
