भारत में इस समय मौसम का रुख पूरी तरह से बदला हुआ नज़र आ रहा है। एक ओर मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी तय समय से पहले शुरू हो गई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह पैटर्न सामान्य से अलग है और इसके पीछे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
रविवार को ही मौसम विभाग ने मुंबई में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की थी। वर्तमान में मुंबई में लगातार हो रही बारिश ने लोगों का जनजीवन पूरी तरीके से प्रभावित कर दिया है। भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई है।
रविवार को ही मौसम विभाग ने मुंबई में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की थी। वर्तमान में मुंबई में लगातार हो रही बारिश ने लोगों का जनजीवन पूरी तरीके से प्रभावित कर दिया है। भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई है।
बता दे कि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार को मुंबई में भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया। शहर के कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई है, जिससे सड़क यातायात और लोकल ट्रेन सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है। एयरपोर्ट पर भी विमानों के परिचालन में दिक्कतें आईं। स्कूल-कॉलेजों को एहतियातन बंद रखा गया और लोगों को घरों से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई।
राजस्थान से समय से पहले मानसून की विदाई
आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान से शुरू हो गई है। यह वापसी सामान्य तिथि से पहले है। आमतौर पर राजस्थान से मानसून की विदाई 17 सितंबर के आसपास होती है और पूरे देश से इसकी वापसी 15 अक्टूबर तक मानी जाती है।
मानसून का पैटर्न क्यों बदला?
इस साल मानसून ने देश में समय से पहले दस्तक दी थी और अब इसकी वापसी भी तय समय से पहले हो रही है। ऐसा पिछले 10 सालों में पहली बार हुआ है। वर्ष 2015 में मानसून की विदाई 4 सितंबर से शुरू हो गई थी, लेकिन उसके बाद से हर साल इसकी वापसी लगभग तय समय के आसपास ही देखी गई।
जानकारी दे दें कि, भारत में मानसून केवल बारिश का मौसम नहीं है, बल्कि यह कृषि, अर्थव्यवस्था और जनजीवन से गहराई से जुड़ा है। इस बार मुंबई में लगातार बारिश और राजस्थान में समय से पहले मानसून की विदाई ने दिखा दिया है कि मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। यह केवल एक अस्थायी घटना नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव का संकेत है, जिसके लिए सरकार, समाज और वैज्ञानिकों को मिलकर रणनीति बनानी होगी।
