नई दिल्ली। भारत आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम और गर्व के साथ मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर ध्वजारोहण करने के बाद राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए विकसित भारत का लक्ष्य रखा और पिछले 12 वर्षों के कार्यों का हिसाब दिया।पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया के कुछ देश पेट्रोल, डीजल, खाद (फर्टिलाइजर), दवाइयों और टेक्नोलॉजिकल चिप्स जैसे जरूरी संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत बनना बहुत जरूरी है। इसीलिए, पिछले कुछ सालों से हमारा यह पक्का इरादा रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, हमें आत्मनिर्भर बनना होगा। हमें अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी और अपने हितों की रक्षा खुद करनी होगी। इसी संकल्प के साथ, हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। हर भारतीय मेक इन इंडिया, स्वदेशी और लोकल फॉर लोकल जैसी पहलों से जुड़ रहा है।”
इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का एक बड़ा सपना है 2047 तक विकसित भारत बनाना। इस सपने को पूरा करने की ताकत और संकल्प 140 करोड़ भारतीयों से मिल रहा है। उन्होंने अगले पांच से सात साल का लक्ष्य बताया और कहा कि जो काम पिछले पांच दशक में नहीं हुए, वह काम हमें 5-7 साल में करने हैं। उन्होंने शक्ति की सप्तधारा का आह्वान किया जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति-शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं।पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों में दलित, आदिवासी, गरीब व मध्यम वर्ग सहित सभी वर्गों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि डिफेंस प्रोडक्शन चार गुना बढ़ा है, खादी और ग्रामोद्योग का प्रोडक्शन पांच गुना बढ़ा है तथा इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सात गुना बढ़ी है। उन्होंने कच्चे तेल पर निर्भरता को गलत सोच का नतीजा बताते हुए समुद्र तट के क्षेत्रों को नो-गो एरिया से गो-अहेड एरिया बनाने का उल्लेख भी किया।
पेट्रोल से चिप्स तक जरूरी संसाधनों पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के कुछ देश पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयों और टेक्नोलॉजिकल चिप्स जैसे जरूरी संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना था कि ऐसी वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अपनी क्षमताओं को इतना मजबूत करना होगा कि किसी भी महत्वपूर्ण क्षेत्र में बाहरी निर्भरता देश के हितों को प्रभावित न कर सके।
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत को अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने, भारतीय कंपनियों को प्रोत्साहित करने, नई तकनीक विकसित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत है।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को भी प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत के पास इस लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता है और इसकी सबसे बड़ी ताकत देश के करोड़ों नागरिक हैं।
प्रधानमंत्री ने अगले पांच से सात वर्षों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जिन कार्यों को पूरा करने में देश को पिछले कई दशकों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, उन्हें अब तेजी से पूरा करने की आवश्यकता है। उनका जोर आर्थिक विकास के साथ-साथ उत्पादन क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता, रक्षा क्षमता, कृषि और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर रहा।
अंत में बता दें कि, 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य लंबी अवधि की यात्रा है। इस दिशा में उत्पादन क्षमता, रोजगार, तकनीकी आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, कृषि विकास और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रगति आवश्यक होगी। स्वतंत्रता दिवस के मंच से प्रधानमंत्री ने इसी व्यापक लक्ष्य को देश के सामने रखते हुए आत्मनिर्भर भारत को भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया।
