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समाचार मिर्ची

पटना: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) ने सोमवार को अपनी निजी आय और जन सुराज पार्टी की फंडिंग का विस्तार से खुलासा किया। पत्रकारों से बातचीत में पीके ने बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2021-22 से 2024-25 तक) के दौरान उन्होंने राजनीतिक सलाहकार सेवाओं के रूप में कुल 241 करोड़ रुपये कमाए हैं।

प्रशांत किशोर ने अपनी आय और जन सुराज पार्टी की फंडिंग का ब्योरा देकर लगता है, नई मुसीबत मोल ले ली है. पेशेवर फीस की बात अलग है, बता दें कि, चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) ने सोमवार को अपनी निजी आय और जन सुराज पार्टी की फंडिंग का विस्तार से खुलासा किया।

बता दें कि, आय और फंडिंग के खुलासे के साथ ही प्रशांत किशोर ने कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि अशोक चौधरी ने पिछले दो वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है। इसके जवाब में अशोक चौधरी ने पीके को 100 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। पीके ने अपने आरोपों में अशोक चौधरी के अलावा शांभवी के पति और सास को भी शामिल किया है।

मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया

पीके का यह खुलासा मीडिया और जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे पारदर्शिता का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ आलोचक इसे राजनीतिक शोर और विवाद के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खुलासे राजनीतिक दलों की फंडिंग और राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करते हैं।

बता दें कि, प्रशांत किशोर का यह खुलासा न केवल उनकी व्यक्तिगत आय और पार्टी फंडिंग की जानकारी देता है, बल्कि यह राजनीतिक दलों और नेताओं में पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। जहां एक ओर पीके ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा पार्टी को दान करके संगठन की मजबूती दिखाई है, वहीं उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और कानूनी विवाद ने राजनीतिक हलकों में नई बहस पैदा कर दी है।

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