नई दिल्लीअगर आपके पास फार्महाउस है तो कद्दू की खेती कम लागत और कम मेहनत में अच्छी कमाई का विकल्प बन सकती है। कद्दू की खेती में ज्यादा खर्च नहीं होता है और यह अच्छी पैदावार देती है। भारत कद्दू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसका उपयोग खाना बनाने और मिठाई बनाने में किया जाता है। कद्दू विटामिन ए और पोटेशियम का अच्छा स्रोत है तथा आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।कद्दू उगाने के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। बुवाई का उचित समय फरवरी-मार्च और जून-जुलाई का महीना है। खेत की तैयारी के लिए दो-तीन बार जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। खेत तैयार करते समय 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाएं।
बीज बोने से पहले उन्हें बेनलेट या बाविस्टिन की हल्की मात्रा से उपचारित कर लें। खेत में धोरेनुमा क्यारियां बनाएं और क्यारियों के बीच चार से पांच मीटर की दूरी रखें। हर टीले पर दो बीज बोएं तथा बीजों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें। बीज को मिट्टी में करीब एक इंच गहराई पर बोना चाहिए। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें।पौधे उगने के बाद देखभाल जरूरी है। पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद करें। खेत को खरपतवार मुक्त रखने के लिए कुल तीन से चार बार निराई-गुड़ाई करें। हर गुड़ाई के समय पौधों की जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाएं, जिससे विकास तेज होता है।
