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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली।मानसून की बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आती है। पर्याप्त वर्षा से खेतों में नमी बढ़ती है और कई फसलों की वृद्धि के लिए जरूरी पानी उपलब्ध होता है। लेकिन लगातार या तेज बारिश के बाद खेत की स्थिति बदल जाती है। ऐसे समय में बारिश रुकते ही किसान अगर बिना खेत की स्थिति देखे जुताई, सिंचाई या मशीनरी का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, तो नई बोई गई फसल को नुकसान हो सकता है। खासकर जिन खेतों में मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है या पानी जमा हो जाता है, वहां जल्दबाजी में किया गया कृषि कार्य फसल और मिट्टी दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

बारिश रुकते ही न करें ये गलती, खराब हो सकती है नई फसल

बारिश खेती के लिए बेहद जरूरी होती है, हालांकि लगातार या तेज बारिश के बाद खेत में कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। खासकर नई बोई गई फसल के लिए बारिश रुकने के तुरंत बाद की गई कुछ गलतियां नुकसान का कारण बन सकती हैं। खेत में पानी जमा होना, मिट्टी का बहुत ज्यादा गीला रहना और बिना स्थिति देखे जुताई या सिंचाई करना फसल की सेहत पर असर डाल सकता है। किसानों के लिए जरूरी है कि बारिश रुकने के बाद खेत की स्थिति का आकलन करें और मिट्टी के पर्याप्त सूखने का इंतजार करें। जल्दबाजी में खेत में भारी मशीनरी चलाने से मिट्टी की संरचना खराब हो सकती है और फसल की जड़ों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

बारिश के तुरंत बाद खेत में न चलाएं भारी मशीन

बारिश रुकते ही ट्रैक्टर या दूसरी भारी मशीनरी लेकर खेत में जाने से बचना चाहिए, खासकर तब जब मिट्टी बहुत गीली हो। गीली मिट्टी पर भारी मशीन चलाने से मिट्टी दब सकती है। इससे मिट्टी में हवा और पानी के आवागमन पर असर पड़ सकता है। अगर खेत में नई फसल लगी है, तो मशीनरी से पौधों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है। इसलिए खेत की नमी और मिट्टी की स्थिति देखकर ही जुताई या अन्य कृषि कार्य करने का फैसला करना चाहिए।

जलभराव को नजरअंदाज न करें

बारिश के बाद खेत में कहीं पानी जमा है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और जड़ सड़ने तथा फसल में फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जरूरत पड़ने पर खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।

बारिश के बाद तुरंत सिंचाई न करें

बारिश रुकने के बाद कई बार किसान नियमित सिंचाई के अनुसार पानी देने लगते हैं। लेकिन बारिश से मिट्टी में पहले से पर्याप्त नमी होती है। ऐसे में बिना मिट्टी की नमी जांचे सिंचाई करने से खेत में अतिरिक्त पानी जमा हो सकता है। इसलिए बारिश के बाद मिट्टी की नमी देखकर ही अगली सिंचाई का निर्णय लेना बेहतर होता है।

नई फसल में खरपतवार पर नजर रखें

बारिश के बाद खेत में नमी बढ़ने के कारण खरपतवार तेजी से उग सकते हैं। इसलिए खेत की नियमित निगरानी करना जरूरी है। ये मुख्य फसल का पानी, पोषक तत्व और जगह ले लेते हैं। बिना जानकारी के किसी खरपतवारनाशी का इस्तेमाल करने से मुख्य फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है।

जल्दबाजी से बचें, खेत की स्थिति देखकर लें फैसला

कुल मिलाकर बारिश किसानों के लिए जितनी उपयोगी है, बारिश के बाद खेत की सही देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। खासकर नई बोई गई फसल में बारिश रुकते ही ट्रैक्टर चलाना, जरूरत से ज्यादा सिंचाई करना या जलभराव को नजरअंदाज करना नुकसान का कारण बन सकता है।

किसानों को बारिश के बाद सबसे पहले खेत का निरीक्षण करना चाहिए। मिट्टी पर्याप्त सूखी है या नहीं, कहीं पानी जमा तो नहीं है और फसल की जड़ों व पौधों की स्थिति कैसी है—इन सभी बातों को देखकर ही अगला कृषि कार्य करना चाहिए। सही समय पर जल निकासी, संतुलित सिंचाई, खरपतवार की निगरानी और मिट्टी की संरचना की सुरक्षा से नई फसल को शुरुआती नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है। इस तरह थोड़ी सावधानी और नियमित निगरानी किसानों की मेहनत और फसल की संभावित पैदावार दोनों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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