ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है, जहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया है। पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं, 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। यह 35 साल बाद बांग्लादेश में किसी पुरुष प्रधानमंत्री का पद संभालना है। बीएनपी ने संसद की 300 सीटों में से 209 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 77 सीटें मिलीं। यह जीत लगभग 20 साल बाद बीएनपी की सत्ता में वापसी है, जो 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन से शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद हुआ।
हालांकि इस ऐतिहासिक जीत के बीच विपक्षी दलों ने तारिक रहमान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन और उसकी सहयोगी नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने दावा किया है कि चुनाव में बड़े पैमाने पर ‘इंजीनियरिंग’ यानी नतीजों में हेरफेर किया गया। एनसीपी नेता नसीरुद्दीन पटवारी ने फेसबुक पर सबसे पहले तारिक रहमान को ‘इंजीनियर’ कहा, जिसका मतलब चुनावी नतीजों को ‘इंजीनियर’ करने वाला यानी हेरफेर करने वाला है। उनका यह पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंचा और सोशल मीडिया पर मीम्स, व्यंग्य और एआई से बनी तस्वीरों की बाढ़ आ गई। इनमें तारिक रहमान को इंजीनियर की हेलमेट पहने दिखाया गया, साथ ही कैप्शन जैसे ‘लंदन से इंजीनियर पास’ या ‘बिना पढ़ाई के इंजीनियर बन गए’ वायरल हो गए।
इस कड़ी में बता दें कि, 14 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब तारिक रहमान से ‘इंजीनियरिंग’ के आरोप पर सवाल किया गया, तो उन्होंने शांत लहजे में जवाब दिया, “मेरी ‘इंजीनियरिंग’ सिर्फ इतनी थी कि मैंने लोगों को अपने पक्ष में वोट देने के लिए मनाया।” उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जीत लोकतंत्र और जनता की इच्छा का परिणाम है। बीएनपी ने भी इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष थे। चुनाव आयोग ने अब तक इन शिकायतों पर कोई बड़ा फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन विवाद जारी है।
यहां यह बताना अति आवश्यक हैं कि, तारिक रहमान का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 1988 में बीएनपी जॉइन की और 2001 के चुनाव में संगठनात्मक भूमिका से पहचान बनाई। लेकिन 2006 के बाद भ्रष्टाचार के आरोप लगे, 2007 में गिरफ्तारी हुई। 2008 में इलाज के बहाने वे लंदन चले गए और 17 साल तक निर्वासन में रहे। इस दौरान वे पार्टी के सीनियर उपाध्यक्ष और फिर कार्यकारी अध्यक्ष बने। कई मामले दर्ज हुए, लेकिन 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अदालतों ने उन्हें बरी कर दिया। पिछले साल वे बांग्लादेश लौटे, मां खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी की कमान संभाली और अब प्रधानमंत्री बन गए।
वही, बीएनपी की जीत को लोकतंत्र की वापसी माना जा रहा है। तारिक रहमान ने जीत के भाषण में कहा कि यह जीत बांग्लादेश और लोकतंत्र की है। वे साफ-सुथरी राजनीति, आर्थिक सुधार और निवेशकों का विश्वास बहाल करने का वादा कर चुके हैं, खासकर गारमेंट सेक्टर को मजबूत करने के लिए। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान से बात की और बधाई दी, दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की उम्मीद जताई।
कुल मिलाकर यह घटनाक्रम दर्शाता है कि बांग्लादेश की राजनीति में परिवारवाद, आरोप-प्रत्यारोप और सोशल मीडिया का प्रभाव कितना मजबूत है। ‘इंजीनियर’ जैसे व्यंग्यपूर्ण उपनाम से राजनीतिक बहस और भी तीखी हो गई है, लेकिन जीत की भव्यता से बीएनपी का मनोबल ऊंचा है। उम्मीद है कि नई सरकार स्थिरता और विकास पर फोकस करेगी।
