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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार शाम व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वे हमेशा पीएम मोदी के दोस्त रहेंगे और भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने के लिए तैयार हैं। उनका यह बयान उस समय आया जब महज़ 12 घंटे पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर भारत और रूस को लेकर तीखी टिप्पणी की थी।

ट्रम्प की टिप्पणी से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने 4 सितंबर को कहा था कि ट्रम्प और PM नरेंद्र मोदी के बीच पहले की खास दोस्ती अब खत्म हो चुकी है। गौतलब हैं कि, ब्रिटिश मीडिया LBC को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने ट्रम्प की नीति की आलोचना करते हुए कहा था, ‘व्हाइट हाउस ने अमेरिका-भारत संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया, जिससे मोदी रूस और चीन के करीब आ गए। चीन ने खुद को अमेरिका और ट्रम्प के विकल्प के रूप में पेश किया है।’

जानकारी दें दें कि, शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था— “ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। उम्मीद है उनका भविष्य अच्छा होगा।” इस बयान को लेकर भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव की आशंका जताई जाने लगी। लेकिन शाम को ट्रम्प का रुख नरम पड़ गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने साफ कहा कि वे मोदी के अच्छे दोस्त हैं और भारत-अमेरिका रिश्तों को फिर से नई ऊँचाइयों पर ले जाने को तैयार हैं।

बता दें कि, ट्रम्प के इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। शनिवार सुबह 9:45 बजे उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा— “राष्ट्रपति ट्रम्प की भावनाओं और हमारे संबंधों को लेकर उनके विचारों की तहे दिल से सराहना करता हूं और उनका पूर्ण समर्थन करता हूं। भारत और अमेरिका के बीच एक सकारात्मक और दूरदर्शी रणनीतिक साझेदारी है।”

ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूरोपीय संघ (EU) को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि गूगल पर 3.5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाना अनुचित है। उन्होंने यूरोप के साथ व्यापारिक असमानताओं पर अपनी नाराजगी दोहराई और कहा कि अमेरिका को वहां से बराबरी का व्यवहार नहीं मिल रहा है।

बता दें कि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रम्प के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिका में चुनावी माहौल बन रहा है। ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी से फिर से राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं और वे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने पुराने रुख को नया आकार देने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-अमेरिका रिश्तों पर उनका यह सॉफ्ट स्टैंड संभवतः भारतीय-अमेरिकी वोटर्स को लुभाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

ट्रम्प के सुबह और शाम के विपरीत बयानों से साफ है कि वे भारत-अमेरिका रिश्तों की अहमियत को भली-भांति समझते हैं। मोदी ने भी उनका समर्थन कर यह संदेश दिया कि भारत द्विपक्षीय संबंधों को सकारात्मक दिशा में ले जाने का इच्छुक है।

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