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नई दिल्ली। शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स पिछले बंद 78,180 अंक की तुलना में 550 अंक से ज्यादा गिरकर 77,611 अंक पर पहुंच गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी पिछले बंद 24,398 अंक से करीब 150 अंक फिसलकर 24,229 अंक पर ट्रेड कर रहा था। इससे पहले पिछले कारोबारी दिन भी दोनों सूचकांक लाल निशान में बंद हुए थे।

इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर मिसाइल हमले किए, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 प्रतिशत पूरा करने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है।इस तनाव के चलते एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई। जापान का निक्केई 500 अंक से ज्यादा गिरा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी एक प्रतिशत से अधिक नीचे रहा। गिफ्ट निफ्टी भी रेड जोन में था, जिससे भारतीय बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ।

कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 72 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा था। इस वजह से महंगाई का जोखिम बढ़ने का डर शेयर बाजार पर हावी रहा।लार्जकैप शेयरों में इंडिगो, एशियन पेंट्स, रिलायंस, बजाज फाइनेंस, आईटीसी और एमएंडएम समेत कई कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई।

अमेरिका-ईरान तनाव बना बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह

विश्लेषकों के अनुसार बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर मिसाइल हमले किए। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है।

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के रुख पर रहेगी। इन सभी कारकों का संयुक्त प्रभाव भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है और निवेशक वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेश संबंधी निर्णय लेते समय जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक रणनीति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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