हरारे स्पोर्ट्स क्लब में 6 फरवरी 2026 को खेला गया आईसीसी अंडर-19 विश्व कप का फाइनल मैच क्रिकेट इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। इस मैच में भारत ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर अपना छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब जीता, जो इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा है। लेकिन इस जीत की असली कहानी है 14 साल के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक पारी। वैभव ने महज 80 गेंदों पर 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली, जिसमें 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे। उनकी इस पारी ने न सिर्फ मैच का रुख पलट दिया, बल्कि कई रिकॉर्ड भी तोड़ दिए।
वैभव की इस पारी के दम पर भारत ने इंग्लैंड को 412 रनों का लक्ष्य दिया। इंग्लैंड ने जवाब में 40.2 ओवर में 311 रन बनाए और ऑलआउट हो गया। कैलेब फाल्कनर ने 115 रनों की शतकीय पारी खेली, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने उन्हें रोक दिया। आरजे अम्ब्रिश ने 3 विकेट लिए। यह जीत भारत के लिए रिकॉर्ड छठी बार विश्व कप जीतने वाली उपलब्धि है, और रनों के अंतर से फाइनल में सबसे बड़ी जीत भी।
जानकारी दे दें , वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ था। फाइनल मैच फरवरी 2026 में खेला गया, तब वे अभी 14 साल के थे। मार्च 2026 के अंत में वे 15 साल के होंगे। इसलिए, अभी वे सीनियर टीम में नहीं खेल सकते। भले ही बीसीसीआई चाहे, लेकिन आईसीसी नियम सख्त है। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में बोर्ड आईसीसी से छूट मांग सकता है, जिसमें खिलाड़ी की फिटनेस, मानसिक परिपक्वता और अनुभव साबित करना पड़ता है। लेकिन ऐसी छूट बहुत दुर्लभ है, और अब तक बहुत कम मामलों में दी गई है।
वैभव के सामने अब अगला रास्ता घरेलू क्रिकेट और आईपीएल है। वे बिहार की रणजी टीम के लिए खेल चुके हैं, और राजस्थान रॉयल्स जैसे फ्रेंचाइजी में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। मार्च 2026 के बाद जब वे 15 साल के हो जाएंगे, तब बीसीसीआई उन्हें सीनियर टीम में चुन सकती है। लेकिन तब तक वे और मजबूत होकर आएंगे।
यह कहानी प्रतिभा की है, लेकिन नियमों की भी। वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी क्रिकेट को नई ऊंचाई देते हैं, लेकिन सुरक्षा और निष्पक्षता के लिए बने नियम उन्हें थोड़ा इंतजार करवा रहे हैं। क्रिकेट प्रेमी उम्मीद करते हैं कि जल्द ही वे सीनियर स्तर पर भी धमाल मचाएंगे। उनकी इस पारी ने साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है, प्रतिभा असली मायने रखती है।
