कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़ी चुनौती देने के लिए एक व्यापक और महत्वाकांक्षी रणनीति तैयार की है। पार्टी ने ‘परिवर्तन यात्रा’ नाम से राज्यव्यापी अभियान की घोषणा की है, जो मार्च महीने में शुरू होकर पूरे पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों को कवर करेगी। यह यात्रा न केवल बीजेपी की जमीनी स्तर पर मजबूती बढ़ाने का माध्यम बनेगी, बल्कि ‘परिवर्तन’ के नारे के साथ मतदाताओं तक पहुंचकर टीएमसी सरकार के खिलाफ असंतोष को संगठित करने का प्रयास भी करेगी।
बीजेपी के अनुसार, कुल नौ ‘परिवर्तन यात्राएं’ (या परिवर्तन रथ यात्राएं) अलग-अलग स्थानों से निकाली जाएंगी। ये यात्राएं कुल 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेंगी और राज्य के हर कोने तक पार्टी का संदेश पहुंचाएंगी। अभियान में 64 से अधिक बड़ी सार्वजनिक रैलियां और 300 से ज्यादा छोटी सभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा कोलकाता के 29 विधानसभा क्षेत्रों में विशेष झांकियां, कैंपेन और पड़ोस स्तर की गतिविधियां भी चलाई जाएंगी। यात्राओं का समापन मार्च के अंत में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक विशाल रैली के साथ होगा, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। यह रैली बीजेपी के अभियान का चरमोत्कर्ष मानी जा रही है।
यात्रा का शुभारंभ और प्रमुख नेता
परिवर्तन यात्रा का औपचारिक शुभारंभ 1 मार्च से शुरू होगा। पहले चरण में कूचबिहार दक्षिण, कृष्णानगर दक्षिण, गरबेटा, रायदिघी और कुल्टी से यात्राएं निकाली जाएंगी। इनमें से रायदिघी (दक्षिण 24 परगना) से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हरी झंडी दिखाकर अभियान की शुरुआत करेंगे। यह स्थान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण बंगाल में बीजेपी का प्रभाव अभी सीमित है और पार्टी यहां अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है।
अंत में यह बता दें कि, परिवर्तन यात्रा न केवल चुनावी रणनीति है, बल्कि बीजेपी की राज्य में स्थायी आधार बनाने की कोशिश भी है। यदि यह अभियान सफल रहा तो 2026 में बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर संभव है। फिलहाल राजनीतिक पारा तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में और गतिविधियां देखने को मिलेंगी।
