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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों पर अमल तेजी से शुरू हो गया है। चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने 22 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक (DGP), कोलकाता पुलिस कमिश्नर और सभी जिलाधिकारियों-पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी 2026 के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

वही, कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि प्रभावित मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। इसके अलावा, क्लास 10 की एडमिट कार्ड (राज्य बोर्ड द्वारा जारी) को वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए। सुनवाई केंद्रों को विकेंद्रीकृत किया जाए ताकि आम लोग आसानी से पहुंच सकें। मतदाता का अधिकृत प्रतिनिधि बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी हो सकता है, और इसके लिए हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप युक्त प्राधिकरण पत्र आवश्यक होगा।

चुनाव आयोग ने अपने पत्र में राज्य के मुख्य सचिव, DGP और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि SIR के दौरान कानून-व्यवस्था सख्ती से बनाए रखी जाए। किसी भी अधिकारी द्वारा अनुशासनहीनता या सहयोग न करने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि, यह SIR प्रक्रिया 1 जनवरी 2026 को योग्यता तिथि मानकर चल रही है। पहले सुनवाई की अंतिम तिथि 7 फरवरी और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन की तिथि 14 फरवरी तय थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि इन समय-सीमाओं में विस्तार संभव है।

यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण है। SIR से मतदाता सूची में शामिल गैर-नागरिकों या दोहरे नामों को हटाने का प्रयास है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई वैध मतदाता प्रभावित न हो। चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से सहयोग मांगा है ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से चले।विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों से SIR प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जन-केंद्रित बनेगी।

आने वाले दिनों में लिस्ट प्रदर्शन और दस्तावेज सत्यापन से लाखों मतदाताओं को राहत मिल सकती है। चुनाव आयोग का यह कदम लोकतंत्र की मजबूती और मतदाता अधिकारों की रक्षा का संकेत है।

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