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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ही सरकार के एक मंत्री ने सार्वजनिक रूप से उसके आदेश का विरोध कर दिया। मामला जाति आधारित रैलियों और सार्वजनिक स्थानों पर जाति का उल्लेख करने पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा है। इस आदेश को योगी कैबिनेट में मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस निर्णय से वंचित और हाशिए पर खड़े समुदायों के न्याय और सम्मान पाने की लड़ाई कमजोर हो जाएगी।

जानकारी दे दें कि, उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद राज्य सरकार ने जाति आधारित रैलियों व सार्वजनिक स्थानों, पुलिस एफआइआर आदि में जातियों के उल्लेख पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए हैं। निषाद पार्टी अध्यक्ष ने इसे लेकर कहा है कि न्यायालय के आदेश पर सरकार को अपील करनी चाहिए थी।

न्यायालय का आदेश और सरकार का कदम

हाल ही में उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए जाति आधारित रैलियों और सार्वजनिक मंचों पर जाति के नाम के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया था। इसके बाद योगी सरकार ने आदेश जारी करते हुए जाति आधारित रैलियों पर रोक लगा दी और पुलिस एफआईआर या अन्य सरकारी दस्तावेजों में जाति का उल्लेख न करने के निर्देश दिए।

बता दें कि, यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला सकता है। जहां एक ओर सरकार सामाजिक संतुलन और जाति आधारित राजनीति को सीमित करने के नाम पर आदेश लागू कर रही है, वहीं उसके ही सहयोगी मंत्री और दल इसे सामाजिक न्याय पर हमला बता रहे हैं।

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