लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रदेश के फूल किसानों और मंडियों में काम करने वाले किसानों के लिए एक के बाद एक कई बड़े फैसले लेकर उन्हें राहत और सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। शनिवार को हुई उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 171वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने छोटे और सीमांत किसानों के हित में कई ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की।
कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की आवश्यकताः बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी परिषद केवल एक संस्थागत निकाय नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान, अधिकार और आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम है. मंडियों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जहाँ किसान सुविधाजनक, सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से अपनी उपज का विक्रय कर सके. मंडियों को उत्तरदायी, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाते हुए इन्हें राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया.
मंडियों में होगी किसानों के आत्मसम्मान की रक्षा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में कहा कि मंडी परिषद केवल संस्थागत निकाय नहीं बल्कि किसानों के आत्मसम्मान और अधिकारों का प्रतीक है। मंडियों को पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाना ज़रूरी है ताकि किसान सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक तरीके से अपनी उपज बेच सकें। उन्होंने मंडियों को राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ बताते हुए इसमें सुधार की दिशा में तेजी लाने के निर्देश दिए।
किसानों के लिए आत्मसम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
बैठक में सीएम योगी ने कहा कि किसानों के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिससे वह बिना किसी शोषण और परेशानी के अपनी मेहनत का उचित मोल पा सके। सरकार का लक्ष्य मंडियों को पारदर्शी बनाना और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इस दिशा में मंडी परिषद को पूरी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो
बता दें कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन फैसलों से प्रदेश के फूल किसानों और मंडियों में काम करने वाले करोड़ों किसानों को राहत मिलेगी। मंडी शुल्क से मुक्ति और मंडियों में सस्ती कैंटीन की सुविधा न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगी बल्कि उनके आत्मसम्मान और अधिकारों की रक्षा भी करेगी। सरकार का यह कदम किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।