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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश एस. के. सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे सोची-समझी साजिश करार दिया और कहा कि यह न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने का जानबूझकर किया गया प्रयास था।

घटना के दौरान न्यायिक अधिकारी घेराबंदी में फंस गए थे। दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुई इस घटना में प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन शाम 8:30 बजे तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। रजिस्ट्रार ने प्रशासन को तत्काल मदद की मांग की थी। डीजीपी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ ग्रुप कॉल पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन व्यावहारिक कदम नहीं उठाए गए। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक मौके पर मौजूद नहीं थे।

मुख्य न्यायाधीश ने राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा, “दुर्भाग्यवश आपके राज्य में हर कोई चीजों को राजनीतिक नजरिए से देखता है। क्या आप सोचते हैं कि हम नहीं जानते कि अपराधी कौन हैं? मैं रात 2 बजे तक सब कुछ देख रहा था। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” पीठ ने राज्य को देश का सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य बताया और मुख्य सचिव, गृह सचिव तथा डीजीपी के आचरण की निंदा की।

कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि पिछले रात सख्त निर्देश जारी करने के बाद ही प्रशासन सक्रिय हुआ। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को स्वयं डीजीपी और गृह सचिव को बुलाना पड़ा। एक घिरे हुए न्यायिक अधिकारी के घर पांच वर्षीय बच्चा इंतजार कर रहा था।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह घटना चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को डराने का प्रयास थी। पीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा और प्रशासनिक विफलता पर गहरी नाराजगी जताई।

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