भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर बड़ा और अहम ऐलान करते हुए भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले अमेरिकी टैरिफ को घटाने की घोषणा की है। इस फैसले को भारत के लिए बड़ी राहत और ‘गुड न्यूज’ माना जा रहा है, क्योंकि नए टैरिफ स्ट्रक्चर में भारत को पाकिस्तान, बांग्लादेश और यहां तक कि चीन से भी कम शुल्क श्रेणी में रखा गया है। यह फैसला न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन में भी भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मुद्दों को लेकर लगातार बातचीत चल रही थी। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित, पारदर्शी और लाभकारी बनाना था। अब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लागू टैरिफ को घटाकर महज न्यूनतम स्तर तक लाने का फैसला किया है। यह संकेत देता है कि अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद और रणनीतिक व्यापारिक साझेदार के रूप में देख रहा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट
टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा होगा। टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी हार्डवेयर और कृषि उत्पाद जैसे सेक्टरों में भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे न सिर्फ निर्यात में इजाफा होगा, बल्कि रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा आय भी बढ़ेगी।
इस संबंध में हम आपको बता दें कि, ट्रंप का यह कदम वैश्विक व्यापार प्रणाली में भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अमेरिका यह साफ कर रहा है कि वह उन देशों को प्राथमिकता देगा, जो पारदर्शी व्यापार नीतियों का पालन करते हैं और रणनीतिक साझेदारी को महत्व देते हैं। भारत को मिली यह तरजीह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसकी बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
वही, विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैरिफ कटौती भारत-अमेरिका संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। यदि दोनों देश इसी तरह आपसी विश्वास और सहयोग को आगे बढ़ाते हैं, तो भविष्य में व्यापक व्यापार समझौतों और निवेश साझेदारियों के रास्ते खुल सकते हैं। भारत के लिए यह मौका है कि वह अपनी निर्यात क्षमता को और मजबूत करे और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका को और विस्तार दे।
