समाचार मिर्ची

समाचार मिर्ची: सबसे तेज़ खबरें, हर पल ताज़ा विश्वसनीय समाचार, हर नजरिए से सही देश-दुनिया की सबसे ताज़ा खबरें खबरें जो आपको बनाए रखें अपडेट राजनीति से लेकर खेल तक, सबकुछ आपको मिलेगा तेज और विश्वसनीय खबरें, बस एक क्लिक दूर हर पल की ताज़ी खबर, बिना किसी झोल के खबरें जो आपको चौंका दें, हर बार जानिए हर अपडेट, सबसे पहले और सबसे सही जहाँ सच्चाई और ताजगी मिलती है

समाचार मिर्ची: सबसे तेज़ खबरें, हर पल ताज़ा विश्वसनीय समाचार, हर नजरिए से सही देश-दुनिया की सबसे ताज़ा खबरें खबरें जो आपको बनाए रखें अपडेट तेज और विश्वसनीय खबरें, बस एक क्लिक दूर हर पल की ताज़ी खबर, बिना किसी झोल के खबरें जो आपको चौंका दें, हर बार जानिए हर अपडेट, सबसे पहले और सबसे सही जहाँ सच्चाई और ताजगी मिलती है

अमेरिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विवादास्पद टैरिफ नीति पर अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है, जो उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही एक बड़ा झटका दे सकता है। 9 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ‘ओपिनियन डे’ तय किया है, जहां ट्रंप द्वारा 1977 के इमरजेंसी पावर कानून के तहत कई देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ की कानूनी वैधता पर निर्णय सुनाया जा सकता है। यह मामला न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा, बल्कि भारत जैसे साझेदार देशों के साथ ट्रेड डील पर भी गहरा असर डालेगा।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल से ही ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के नारे के तहत संरक्षणवादी नीतियां अपनाईं। 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करके उन्होंने कई देशों से आयात पर 10 से 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए। इस कानून का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय आपातकाल में विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करना या व्यापार पर प्रतिबंध लगाना था, लेकिन ट्रंप ने इसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया। उदाहरण के लिए, स्टील और एल्युमिनियम पर 25-10 प्रतिशत टैरिफ लगाए गए, जो चीन, कनाडा, मैक्सिको और यूरोपीय संघ जैसे देशों को निशाना बनाते थे।

हालांकि, यह नीति विवादों में घिर गई। कई कंपनियां और व्यापार संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, दावा करते हुए कि ट्रंप ने कानून की सीमाओं को पार किया है। निचली अदालतों ने ट्रंप के पक्ष में फैसला नहीं दिया। उदाहरण के लिए, अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने कहा कि IEEPA का इस्तेमाल इतने व्यापक टैरिफ के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा नहीं है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां नवंबर 2025 में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कंजर्वेटिव और लिबरल दोनों जजों ने सवाल उठाए।

जानकारी दे दें कि, अब 9 जनवरी को ओपिनियन डे पर फैसला आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट नहीं किया कि कौन से केस पर निर्णय होगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रंप टैरिफ केस ही होगा, क्योंकि सुनवाई तेजी से हुई थी। यदि कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला देता है, तो यह उनकी हार होगी। टैरिफ रद्द होने से अमेरिकी आयात सस्ता हो सकता है,

बता दें कि, ट्रंप की टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार को हिला दिया है। चीन के साथ ट्रेड वॉर से सप्लाई चेन बाधित हुई, WTO में विवाद बढ़े। कनाडा और मैक्सिको के साथ USMCA डील हुई, लेकिन टैरिफ बने रहे। भारत के साथ डेयरी मार्केट एक्सेस, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और H-1B वीजा जैसे मुद्दे जुड़े हैं।यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की दिशा तय करेगा। यदि हार हुई, तो कांग्रेस से नया कानून बनवाना पड़ेगा। फिलहाल, दुनिया की नजरें 9 जनवरी पर टिकी हैं। भारत के लिए यह ट्रेड संबंधों का टर्निंग पॉइंट हो सकता है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version