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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। घर के आंगन, बालकनी या मंदिर में लगा तुलसी का पौधा करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में इसे सबसे पवित्र स्थान दिया गया है और रोज इसकी पूजा की जाती है। आयुर्वेद में भी तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। सही देखभाल न मिलने पर कई बार यह पौधा सूखने लगता है, जिसे लोग अशुभ संकेत मान लेते हैं, जबकि इसके पीछे देखभाल से जुड़ी छोटी गलतियां भी हो सकती हैं।

यहा यह जानना अति आवश्यक हैं कि, तुलसी के पौधे को नियमित रूप से पानी देना जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी नुकसानदायक साबित हो सकता है। ज्यादा पानी से जड़ों में फंगस लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पौधा सूख सकता है। गर्म मौसम में सुबह या शाम के समय पानी देना बेहतर माना जाता है। ठंड के मौसम में जरूरत के अनुसार एक दिन छोड़कर भी पानी दिया जा सकता है। पानी उतना ही डालें कि मिट्टी अच्छी तरह नम हो जाए, लेकिन उसमें पानी जमा न रहे।

इस कड़ी में हम आपको इतना बताते चले कि, पौधे को हरा-भरा रखने के लिए उसकी मंजरियों को समय-समय पर अलग करते रहना चाहिए। लंबे समय तक मंजरियां बने रहने पर तुलसी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। मंजरी तोड़ते समय नाखून का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हर मौसम में देखभाल का तरीका अलग होता है। सर्दियों में पाले से बचाने के लिए पौधे को पतले और साफ कपड़े से ढककर रखा जा सकता है। बारिश के मौसम में लगातार बारिश होने पर हफ्ते में एक या दो बार ही पानी देना पर्याप्त माना जाता है। गर्मियों में तुलसी को तेज धूप से बचाना चाहिए, क्योंकि ज्यादा गर्मी में पौधा सूख सकता है।

जरूरत के अनुसार ही दें पानी

तुलसी के पौधे की सबसे बड़ी जरूरत संतुलित मात्रा में पानी है। कई लोग यह सोचकर रोजाना अधिक मात्रा में पानी डालते हैं कि इससे पौधा तेजी से बढ़ेगा, लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। जरूरत से ज्यादा पानी देने पर मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे जड़ों में फंगस लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसका असर पौधे की जड़ों पर पड़ता है और धीरे-धीरे वह सूखने लगता है।

गर्मियों में सुबह जल्दी या शाम के समय पानी देना बेहतर माना जाता है। इस समय मिट्टी नमी को अच्छी तरह बनाए रखती है। वहीं सर्दियों में पौधे को रोज पानी देने की आवश्यकता नहीं होती। मौसम और मिट्टी की नमी के अनुसार एक दिन छोड़कर भी पानी दिया जा सकता है। ध्यान रखें कि मिट्टी नम रहे, लेकिन गमले या मिट्टी में पानी जमा न हो।

अंत में हम आपको बता दें कि, अगर नियमित पानी देने के बाद भी पौधा सूखने लगे तो इसमें पोषक तत्वों की कमी भी एक कारण हो सकती है। ऐसे में गाय के गोबर का घोल और सूखे नीम के पत्तों का पाउडर मिलाकर हफ्ते में एक बार जड़ों में डाला जा सकता है। सूखे केले के छिलकों का पाउडर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। केले के छिलकों में पोटैशियम और नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पौधे की बढ़वार में मदद करते हैं। इसके लिए सूखे छिलकों का पाउडर बनाकर एक से दो चम्मच पानी में मिलाकर जड़ों में डाल सकते हैं।

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