उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर ने एक क्रांतिकारी अगेती किस्म ‘को.शा. 19231’ विकसित की है, जो पैदावार के मामले में पुराने रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार है। यह किस्म किसानों को प्रति हेक्टेयर 1000 क्विंटल तक का बंपर उत्पादन देने की क्षमता रखती है। साथ ही चीनी मिलों के लिए उच्च रिकवरी वाली साबित हो रही है। इस किस्म की जमाव क्षमता और टिलरिंग जबरदस्त है, तथा पेड़ी फसल लेने की क्षमता भी बहुत अच्छी है।
यह किस्म विशेष रूप से बसंत और शरद कालीन बुवाई के लिए तैयार की गई है, जिससे किसान साल में दो बार बुवाई कर सकते हैं। इसमें चीनी का प्रतिशत नवंबर में ही 11% से अधिक रहता है, जो आगे चलकर और बढ़ता है। किसान ‘सिंगल बड’ तकनीक अपनाकर बीज को 100 गुना तक बढ़ा सकते हैं, जबकि सामान्य तरीके से केवल 10 गुना बढ़ता है। इससे बीज की लागत कम होती है और कम समय में बड़े क्षेत्र के लिए बीज तैयार हो जाता है। यह नई किस्म धीरे-धीरे पुरानी किस्मों जैसे 0238 का स्थान ले रही है, जिससे किसानों को रोगमुक्त और अधिक वजन वाला गन्ना मिलेगा।
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के प्रसारण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि इस किस्म की बेहतरीन बढ़वार और जमाव के लिए जानी जाती है। सामान्य खेती की परिस्थितियों में भी 1000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार हासिल की जा सकती है। शाहजहांपुर संस्थान की ओर से फरवरी 2026 में ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से लगभग 1.60 लाख सिंगल बड किट किसानों को वितरित की गई हैं। को.शा. 19231 के साथ-साथ 18231 और 13235 जैसी किस्में भी काफी लोकप्रिय हो रही हैं।
