अमेरिका। अमेरिका ने एच-1बी वीजा देने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब लाभार्थियों का चयन रैंडम लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन स्तर के आधार पर किया जाएगा। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने फॉर्म I-129 का नया संस्करण जारी किया है, जिसमें कंपनियों को नौकरी से संबंधित अधिक जानकारी देनी होगी। यह नया सिस्टम 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य हो जाएगा।
नए नियम के तहत आवेदकों को चार वेतन स्तरों में वर्गीकृत किया जाएगा, जो अमेरिकी श्रम विभाग के मानक वेतन के आधार पर तय होते हैं। स्तर 1 (एंट्री लेवल) में सैलरी ₹69-83 लाख के बीच होती है, जबकि स्तर 4 (टीम लीडर) में ₹1.24 करोड़ से अधिक। उच्च वेतन स्तर वाले आवेदकों को चयन में अधिक अवसर मिलेंगे। उदाहरण के लिए, स्तर 4 वाले आवेदकों को चार गुना एंट्री मिलेगी, जबकि स्तर 1 वाले को केवल एक। इससे पहले सभी स्तरों की संभावना समान (लगभग 29.59%) थी, लेकिन नए सिस्टम में स्तर 1 की संभावना घटकर 15.29% रह जाएगी और स्तर 4 की 61.16% तक बढ़ जाएगी।
यह बदलाव उच्च कुशल और उच्च वेतन वाले पेशेवरों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से किया गया है। एच-1बी वीजा मुख्य रूप से तकनीकी क्षेत्र में विदेशी श्रमिकों के लिए जारी किया जाता है, जिसमें लगभग 70% वीजा भारतीय पेशेवरों को मिलते हैं। कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, कॉग्निजेंट और एचसीएल प्रमुख प्रायोजक हैं। वीजा की अवधि तीन साल की होती है, जिसे एक बार तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
नए फॉर्म I-129 में नियोक्ताओं को नौकरी की न्यूनतम योग्यता, अनुभव और विशेष कौशलों का विस्तार से उल्लेख करना होगा। यह बदलाव वित्तीय वर्ष 2027 के एच-1बी कैप रजिस्ट्रेशन से प्रभावी होगा, जिससे कम वेतन वाली नौकरियों में चयन की संभावना कम हो जाएगी।
