उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सोमवार शाम एक इफ्तार पार्टी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह इफ्तार कार्यक्रम गंगा नदी के बीच नाव पर आयोजित किया गया था, जिसमें कथित तौर पर चिकन बिरयानी परोसे जाने और उसके अवशेष नदी में फेंके जाने के आरोप सामने आए हैं। इस घटना ने धार्मिक भावनाओं, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव जैसे कई मुद्दों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मामले के अनुसार, सोमवार शाम कुछ लोगों ने गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। इफ्तार के दौरान मेहमानों को चिकन बिरयानी सहित अन्य खाद्य पदार्थ परोसे गए। आरोप है कि भोजन के बाद बचे हुए हड्डी के टुकड़े और अन्य अवशेष सीधे गंगा नदी में ही फेंक दिए गए। यह आरोप सामने आते ही स्थानीय स्तर पर आक्रोश फैल गया और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गंगा नदी में कचरा या अवशेष फेंकने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों पर पर्यावरण संरक्षण कानूनों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, यदि किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के प्रमाण मिलते हैं, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
