नई दिल्ली। वॉटर एप्पल की बागवानी आजकल किसानों के लिए बंपर कमाई का जरिया बन चुकी है। कम लागत और कम पानी में तैयार होने वाली इस फसल से हर साल लाखों रुपये का मुनाफा कमाया जा सकता है। यह फल मुख्य रूप से थाईलैंड और बांग्लादेश जैसे गर्म देशों का है।
जानकारी दे दें कि, वॉटर एप्पल नाशपाती जैसा दिखता है और इसका रंग लाल, हरा या सफेद होता है। गर्मियों में इसमें 93 प्रतिशत तक पानी होता है, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। पहले इसे केवल दक्षिण भारत या विदेशों में ही उगाया जा सकता था, लेकिन अब भारत की गर्म जलवायु और मिट्टी में भी इसे आसानी से उगाया जा रहा है।
यहां यह बता दें कि, यह एक लो-मेंटेनेंस फसल है। बागवानी शुरू करने में शुरुआती खर्च के बाद इसमें ज्यादा पानी या महंगे रासायनिक खाद-कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती। पौधे लगाने के एक साल के अंदर फल आने शुरू हो जाते हैं। दो से ढाई साल में पेड़ पूर्ण विकसित हो जाता है और एक पेड़ से 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक फल मिल सकता है।मई-जून में पकने वाले इस फल की थोक बाजार में कीमत 150 से 300 रुपये प्रति किलो तक है। बड़े शहरों के मॉल और फ्रूट मार्केट में दाम और भी ज्यादा होते हैं। हाई-डेंसिटी फार्मिंग से एक एकड़ में लगाए गए पौधों से सालाना लाखों रुपये का नेट प्रॉफिट निकाला जा सकता है।
अब भारत में भी सफलतापूर्वक हो रही खेती
कुछ वर्ष पहले तक यह माना जाता था कि वॉटर एप्पल की खेती केवल दक्षिण भारत या विदेशी देशों में ही संभव है। लेकिन बदलती कृषि तकनीकों और अनुकूल जलवायु के कारण अब भारत के कई राज्यों में इसकी सफल खेती की जा रही है। गर्म और आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में इसके पौधे अच्छी वृद्धि करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, उचित जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी और सामान्य देखभाल के साथ किसान इसकी व्यावसायिक बागवानी शुरू कर सकते हैं। कई किसान इसे पारंपरिक फलों के साथ मिश्रित बागवानी के रूप में भी अपना रहे हैं।
चलते चलते बताते चले कि, देश में बागवानी आधारित खेती का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ उच्च मूल्य वाली फलों की खेती को भी अपना रहे हैं। वॉटर एप्पल ऐसा ही एक विदेशी फल है, जो कम लागत, कम पानी, जल्दी उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यदि किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसकी वैज्ञानिक खेती करें और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन करें, तो यह फसल भविष्य में उनकी आय बढ़ाने का मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।
