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कोलकाता।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार का चुनाव केवल राजनीतिक दलों के वादों और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों ने एक ऐसी सच्चाई उजागर की है, जो लोकतंत्र के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट ने उम्मीदवारों की संपत्ति, आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य विवरणों को सामने लाकर चुनावी परिदृश्य को और दिलचस्प बना दिया है।

शिक्षा और अन्य पहलू
रिपोर्ट यह भी बताती है कि उम्मीदवारों के बीच शिक्षा और उम्र को लेकर भी बड़ी विविधता है. हालांकि, इस बार मुख्य फोकस धनबल और बाहुबल पर है. चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सभी उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी, ताकि मतदाता एक जागरूक फैसला ले सकें.

अमीरी-गरीबी की खाई हुई उजागर

ADR की रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में चुनाव लड़ रहे 1,478 उम्मीदवारों में भारी आर्थिक असमानता देखने को मिल रही है। एक ओर जहां कुछ उम्मीदवारों के पास सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति है, वहीं दूसरी ओर ऐसे प्रत्याशी भी हैं जिनकी कुल संपत्ति महज 500 रुपये तक सीमित है। यह अंतर न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लोकतंत्र में भागीदारी के लिए आर्थिक स्थिति कितनी विविध हो सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ उम्मीदवारों की संपत्ति एक सामान्य दिहाड़ी मजदूर की एक दिन की आय से भी कम है। यह स्थिति उन उम्मीदवारों की आर्थिक संघर्ष की कहानी भी बयां करती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

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