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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की तीन प्रमुख ताकतें ऐसी बताई जा रही हैं, जिनके सहारे ममता बनर्जी भाजपा को अकेले रोकने में सफल दिख रही हैं। कोलकाता के एक प्रोफेसर बिश्वनाथ चक्रवर्ती ने एक इंटरव्यू में इन तीन पॉवर का जिक्र किया। टीएमसी नेता अब कह रहे हैं कि ‘जय श्रीराम’ का नारा भाजपा की प्रॉपर्टी नहीं है और ममता बनर्जी इस चुनाव में भाजपा की पिच पर बैटिंग कर रही हैं।

इन तीन ताकतों में पहली यह है कि बंगाल में विपक्ष बंटा हुआ और कमजोर नजर आ रहा है। दूसरी ताकत हर वर्ग के लिए मुफ्त में कुछ न कुछ दिए जाने की योजना है। तीसरी ताकत एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ राज्य से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने से ममता बनर्जी की ‘फाइटर’ वाली इमेज बरकरार रहना है।

प्रोफेसर चक्रवर्ती के अनुसार, बेरोजगारी, उद्योगों की कमी, सत्ता विरोधी लहर और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों के बावजूद भाजपा ममता बनर्जी के खिलाफ पिछले पांच वर्षों में कोई बड़ा आंदोलन या मोर्चा नहीं खड़ा कर पाई। भाजपा यूपी-बिहार मॉडल अपनाती रही, जबकि बंगाल मॉडल पर काम नहीं कर पाई।

इस चुनाव में मतुआ वोटरों के नाम एसआईआर में कटने का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। टीएमसी भाजपा पर हिंदू वोटरों के अधिकार छीनने का आरोप लगा रही है। बंगाल में दो चरणों में मतदान होने वाला है, जबकि अन्य राज्यों में एक चरण में वोटिंग हो रही है।

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