कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज को सम्मानित करना, माकपा के युवा नेता प्रतिकुर रहमान का तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होना और पूर्व फुटबॉलर व विधायक दीपेंदु विश्वास का भाजपा छोड़कर टीएमसी में वापस लौटना—ये घटनाएं राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही हैं। ये बदलाव न केवल विपक्षी दलों को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि टीएमसी की रणनीति को भी उजागर कर रहे हैं। आइए, इन घटनाओं के मायने समझते हैं और चुनावी परिदृश्य पर उनके प्रभाव का विश्लेषण करते हैं।सबसे पहले बात करें अनंत महाराज की। 22 फरवरी 2026 को कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज को पश्चिम बंगाल का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ से नवाजा।
वही, माकपा नेता प्रतिकुर रहमान के टीएमसी में शामिल होने पर नजर डालें। माकपा की राज्य समिति के सदस्य रहमान ने 21 फरवरी 2026 को टीएमसी सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से मुलाकात के बाद पार्टी जॉइन की। शामिल होने के बाद उन्होंने कहा, “यह तो केवल ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।” यह बयान इशारा करता है कि वामपंथी दलों से और भी नेता टीएमसी की ओर रुख कर सकते हैं। रहमान युवा नेता हैं और माकपा के युवा विंग में सक्रिय रहे हैं। उनका जाना वाम मोर्चे के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि बंगाल में वामपंथी पार्टियां पहले से ही कमजोर हो चुकी हैं।
इसी कड़ी में पूर्व फुटबॉलर दीपेंदु विश्वास का मामला भी महत्वपूर्ण है। उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट दक्षिण से टीएमसी के पूर्व विधायक विश्वास, जो 1990 और 2000 के दशक में कोलकाता के शीर्ष क्लबों के लिए खेल चुके हैं, ने 22 फरवरी 2026 को भाजपा छोड़कर टीएमसी में वापसी की। उन्होंने कहा कि भाजपा से उनका जुड़ाव ‘भावनात्मक कारणों’ से था। 2021 चुनाव से पहले टिकट न मिलने पर उन्होंने टीएमसी छोड़ी थी और भाजपा में गए थे। उनके साथ कांग्रेस, माकपा और भाजपा के कई नेता व कार्यकर्ता भी टीएमसी में शामिल हुए, जिसमें बसीरहाट के एक ब्लॉक स्तरीय कांग्रेस पदाधिकारी भी हैं।
ये घटनाएं समग्र रूप से क्या मायने रखती हैं? सबसे बड़ा संकेत है टीएमसी की चुनावी तैयारी। ममता बनर्जी की पार्टी विपक्षी दलों से नेताओं को तोड़कर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। यह ‘ऑपरेशन लोटस’ का उलटा संस्करण लगता है, जहां टीएमसी विरोधियों को अपने पाले में ला रही है। कांग्रेस और वामदल पहले से ही कमजोर हैं, और कांग्रेस ने हाल ही में बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का संकेत दिया है।
कुल मिलाकर, ये सरगर्मियां दर्शाती हैं कि बंगाल की राजनीति में टीएमसी आक्रामक मोड में है, जबकि विपक्ष बिखर रहा है। अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो 2026 चुनाव में टीएमसी की जीत आसान हो सकती है, लेकिन विपक्ष अगर एकजुट हुआ तो मुकाबला रोचक होगा। फैंस को इंतजार रहेगा ‘पिक्चर’ का!
