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समाचार मिर्ची

कोलकाता:पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बाद कुल करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए हैं। यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 12 प्रतिशत है। एसआईआर की प्रक्रिया पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई थी, जब राज्य में कुल मतदाता संख्या करीब 7.66 करोड़ थी।

इन 91 लाख नामों में से 63 लाख से अधिक को फरवरी 2026 में जारी सूची में ही हटा दिया गया था। इन्हें अनुपस्थित, कहीं और चले गए, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखा गया। इसके अलावा 60.06 लाख वोटरों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी जांच के दायरे में रखा गया, क्योंकि उनके रिकॉर्ड में तार्किक गड़बड़ियां पाई गईं, जैसे नाम की स्पेलिंग में गलती, जेंडर में त्रुटि या माता-पिता से उम्र का असामान्य अंतर।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को इन वोटरों की योग्यता की जांच सौंपी गई थी। सोमवार 8 अप्रैल 2026 को इनमें से करीब 27 लाख वोटरों (लगभग 45 प्रतिशत) को अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह प्रक्रिया विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई है। चुनाव आयोग ने 23 अप्रैल को मतदान होने वाली 152 सीटों के लिए वोटर लिस्ट फ्रीज कर दी है, जबकि शेष 142 सीटों के लिए 9 अप्रैल को फ्रीज किया जाएगा।

एसआईआर की यह प्रक्रिया सबसे पहले बिहार में शुरू हुई थी और बाद में नौ राज्यों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की गई। पश्चिम बंगाल में इसे लेकर सबसे अधिक विवाद हुआ। अयोग्य घोषित वोटरों के नाम अभी पूरी तरह हटाए नहीं गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 19 अपील ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जहां आपत्ति दर्ज की जा सकती है। हालांकि समय सीमा के कारण इन वोटरों के लिए इस चुनाव में वोट देने का मौका नहीं मिल पाएगा।

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