नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई हो रही है। इस सुनवाई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने मुख्य न्यायाधीश से अनुमति मांगी है कि वे अपनी याचिका पर खुद दलीलें पेश कर सकें। यदि अनुमति मिलती है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा जब कोई कार्यरत मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका पर व्यक्तिगत रूप से बहस करेगी।
SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों विवादित?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) द्वारा शुरू की गई एक विशेष प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है। इसमें घर-घर जाकर मतदाताओं की जांच की जाती है, ताकि सभी पात्र भारतीय नागरिकों को सूची में शामिल किया जा सके और कोई अयोग्य व्यक्ति (जैसे मृतक, स्थानांतरित या गैर-नागरिक) शामिल न रहे। यह प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी और 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले लागू की गई है। चुनाव आयोग ने इसे संविधान के अनुच्छेद 324, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियमों के तहत वैध बताया है।
मगौरतलब हैं कि, ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को अपनी व्यक्तिगत याचिका दायर की, जिसमें ECI और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया गया। इससे पहले टीएमसी सांसदों डेरेक ओ’ब्रायन और दोला सेन ने भी इसी मुद्दे पर याचिका दायर की थी। याचिका में SIR को असंवैधानिक और पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे रद्द करने तथा मौजूदा 2025 की मतदाता सूची पर ही चुनाव कराने की मांग की गई है।
चलते चलते बताते चले कि, पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने की संभावना है। SIR विवाद ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। टीएमसी इसे “लोकतंत्र पर हमला” बता रही है, जबकि बीजेपी इसे “चुनावी शुद्धता” का मुद्दा मान रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल मतदाता सूची पर, बल्कि राज्य की राजनीति पर भी गहरा असर डालेगा।यदि SIR जारी रहा तो लाखों मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जबकि यदि रोका गया तो ECI की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। ममता बनर्जी की यह लड़ाई उनकी छवि को मजबूत करने के साथ-साथ टीएमसी के लिए एकजुटता का प्रतीक भी बन सकती है।
