नई दिल्ली: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों को पूरी तरह फर्जी करार दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसी किसी भी प्रस्ताव पर विचार तक नहीं कर रही है।मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कुछ समाचार रिपोर्टों में विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम 25-30 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने इन खबरों का सख्त खंडन किया और इन्हें भ्रामक बताया।
मंत्रालय ने आगे बताया कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां जनता पर ईंधन का अतिरिक्त भार नहीं डाला गया। भारत अकेला ऐसा देश है जहां पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं।मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की खबरें नागरिकों के बीच डर और घबराहट फैलाने के उद्देश्य से शरारतपूर्ण ढंग से फैलाई जा रही हैं। इसके विपरीत, भारत सरकार और तेल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी से आम लोगों को बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।
अफवाहों का बाजार गर्म, सरकार ने दी सफाई
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश तेजी से वायरल हो रहे थे, जिनमें दावा किया जा रहा था कि चुनावी प्रक्रिया समाप्त होते ही सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करेगी। इन संदेशों में यह भी कहा जा रहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण यह निर्णय लिया जा सकता है।
हालांकि, सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार की खबरें जनता के बीच डर और भ्रम फैलाने के उद्देश्य से जानबूझकर फैलाई जा रही हैं। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट या संदिग्ध खबर को साझा करने से बचें।
आम जनता को राहत देने के लिए उठाए गए कदम
सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं। तेल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू बाजार में इसका पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला।
इसके अलावा, सरकार ने समय-समय पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती जैसे कदम भी उठाए, जिससे आम लोगों को राहत मिली। इन प्रयासों का उद्देश्य महंगाई को नियंत्रण में रखना और आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से बचाना रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश
पेट्रोलियम मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी प्रकार की असामान्य वृद्धि की कोई योजना नहीं है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों से बचें और घबराकर किसी भी तरह की अनावश्यक खरीद या प्रतिक्रिया न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, विनिमय दर (Exchange Rate), टैक्स संरचना और घरेलू नीतियां शामिल हैं। ऐसे में किसी भी बड़े बदलाव से पहले सरकार द्वारा आधिकारिक घोषणा की जाती है।
