कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल 2026 को 152 सीटों पर चल रहा है। सुबह 9 बजे तक इन सीटों पर 18.76 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वर्ष 2021 के चुनाव में इन सीटों पर लगभग 82.70 प्रतिशत मतदान हुआ था।
मतदान के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के नोदा क्षेत्र में अज्ञात व्यक्तियों ने देसी बम फेंके, जिसमें कई लोग घायल हो गए। मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज गर्ल्स स्कूल बूथ पर ईवीएम खराब होने के कारण मतदान में देरी हुई, जिससे मतदाताओं में नाराजगी देखी गई।मालदा जिले के बालूचरा हाई स्कूल मतदान केंद्र पर भी ईवीएम खराब होने को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई। तृणमूल कांग्रेस नेता रिजू दत्ता ने कहा कि कुछ छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर, जिन्हें पहले ही निपटा लिया गया है, कोई बड़ी घटना नहीं हुई है और मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी है।मतदान प्रक्रिया सुबह से शुरू होकर दिनभर चल रही है। राज्य निर्वाचन आयोग इन घटनाओं पर नजर बनाए हुए है।
मुर्शिदाबाद में हिंसा और सुरक्षा पर सवाल
मुर्शिदाबाद के नोदा इलाके में हुई बमबाजी की घटना ने चुनावी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक हुए इस हमले से मतदान केंद्रों के आसपास अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घायल लोगों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की थी। इसके बावजूद इस प्रकार की हिंसा यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
ईवीएम खराबी से बढ़ी मतदाताओं की नाराजगी
मतदान प्रक्रिया के दौरान तकनीकी खामियां भी सामने आईं। मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज गर्ल्स स्कूल मतदान केंद्र पर ईवीएम मशीन में खराबी आने के कारण मतदान में देरी हुई। इससे मतदाताओं को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और कई लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की।
इसी तरह मालदा जिले के बालूचरा हाई स्कूल मतदान केंद्र पर भी ईवीएम में तकनीकी समस्या आने से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। चुनाव अधिकारियों ने बाद में मशीन को ठीक कर मतदान प्रक्रिया को पुनः शुरू कराया, लेकिन इस दौरान मतदाताओं की संख्या में अस्थायी गिरावट देखी गई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में सामने आई हिंसा और तकनीकी समस्याएं यह दर्शाती हैं कि अभी भी चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित बनाने के लिए कई चुनौतियां बाकी हैं। हालांकि, प्रशासन और चुनाव आयोग की तत्परता से स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।
