कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबले के बीच वामपंथी पार्टियां अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। दमदम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में सीपीआई(एम) की उम्मीदवार दीपसीता धर, जो जेएनयू छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष हैं, रोड शो कर रही हैं जहां लाल झंडों के साथ भीड़ नजर आ रही है। वामपंथी 2011 से सत्ता से बाहर हैं और पिछले चुनावों में काफी कमजोर पड़े हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) को एक भी सीट नहीं मिली और वोट शेयर पांच प्रतिशत से नीचे रहा। 2024 लोकसभा चुनाव में भी उन्हें कोई सीट हासिल नहीं हुई। 2019 लोकसभा चुनाव में वाम मोर्चे का वोट शेयर सात प्रतिशत रहा था। दमदम उत्तर सीट पर 2016 में सीपीआई(एम) विजयी हुई थी, लेकिन पिछले चुनाव में टीएमसी ने जीत हासिल की।
सीपीआई(एम) उम्मीदवार दीपसीता धर ने कहा कि उनकी पार्टी लोकप्रिय राजनीति नहीं कर रही है बल्कि लोगों को जागरूक और सशक्त बनाने का काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि लोग अब टीएमसी के शासन के नुकसान समझने लगे हैं और भाजपा शासित राज्यों की स्थिति भी देख रहे हैं। धर का कहना है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी को केवल वामपंथी ही हरा सकते हैं। भाजपा जितनी मजबूत होगी, टीएमसी भी उतनी ही मजबूत रहेगी।
सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता बिमान बोस ने बताया कि वे रोज 12 से 15 किलोमीटर पैदल चलकर प्रचार कर रहे हैं और इस बार उनकी पार्टी शून्य पर नहीं रहेगी। वरिष्ठ पत्रकार सुमन भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सीपीआई(एम) के वोट और काडर दोनों को टेकओवर किया है। कई पूर्व सीपीएम नेता और उनके परिवार के सदस्य अब भाजपा में हैं। आम लोगों में भी वामपंथ को टीएमसी का विकल्प मानने वाले हैं, हालांकि वोट के समय भीड़ का असर पड़ने पर संदेह जताया जा रहा है।
