कोलकाता।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में वोटिंग के दौरान कई जगहों पर तनाव और घटनाएं सामने आईं। नदिया जिले के चापड़ा में बूथ नंबर 53 पर भाजपा के पोलिंग एजेंट पर हमला किया गया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि हमलावर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे।नदिया के शांतिपुर, निमतला और भांगर समेत अन्य क्षेत्रों में भी तनाव की खबरें आईं। इन घटनाओं से मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई।
हावड़ा में ईवीएम खराबी को लेकर झड़प हुई। बाली मतदान केंद्र पर ईवीएम ग्लिच की वजह से मतदान प्रक्रिया तीन बार बाधित हुई। नई मशीन लाने के बावजूद दिक्कत बनी रही, जिससे मतदान में देरी हुई। एक मतदाता मयूर जैन ने बताया कि वे सुबह सात बजे से लाइन में थे, लेकिन बार-बार मतदान रोका गया और शोर-शराबा हुआ।CRPF ने हंगामा करने वाले दो लोगों को हिरासत में लिया। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने का प्रयास किया।
नदिया में पोलिंग एजेंट पर हमला
नदिया जिले के चापड़ा क्षेत्र में बूथ नंबर 53 पर मतदान के दौरान हिंसा की घटना सामने आई। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक पोलिंग एजेंट पर कुछ अज्ञात लोगों द्वारा हमला किया गया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि हमलावर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े हुए थे। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
भाजपा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं चुनाव को प्रभावित करने और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश हैं। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हावड़ा में EVM गड़बड़ी से मतदान बाधित
हावड़ा जिले के बाली मतदान केंद्र पर EVM में तकनीकी खराबी के कारण मतदान प्रक्रिया तीन बार बाधित हुई। मतदान सुबह से शुरू होने के बाद मशीन में गड़बड़ी की शिकायत आई, जिसके बाद उसे बदलने की कोशिश की गई। नई मशीन लाने के बावजूद समस्या पूरी तरह हल नहीं हो सकी, जिससे मतदाताओं को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
एक मतदाता मयूर जैन ने बताया कि वे सुबह 7 बजे से लाइन में खड़े थे, लेकिन बार-बार मतदान रुकने के कारण उन्हें काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा, “हम कई घंटे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन मशीन बार-बार खराब हो रही है। इससे लोगों में नाराजगी और हताशा बढ़ रही है।”
EVM में आई इस तकनीकी गड़बड़ी ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं, हालांकि चुनाव आयोग लगातार यह दावा करता रहा है कि मशीनें पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय हैं।
