कोलकाता।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में Axis My India ने एग्जिट पोल जारी न करने का फैसला लिया है। एजेंसी के एमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में डेटा जारी करना सही नहीं होगा क्योंकि सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि बंगाल के ज्यादातर वोटरों ने सर्वे के दौरान चुप्पी साध ली।
प्रदीप गुप्ता के अनुसार, लगभग 60-70 प्रतिशत लोगों ने वोट किसे दिया, यह बताने से इनकार कर दिया। पहले चरण के बाद टीम जब लोगों से बात करने गई तो बड़ी संख्या में वोटर कुछ कहने को तैयार नहीं हुए। एजेंसी फेस टू फेस सर्वे करती है, लेकिन इस बार पर्याप्त प्रतिनिधित्व वाला सैंपल नहीं मिल सका।
दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत वोटिंग दर्ज हुई, जिसमें महिलाओं का मतदान प्रतिशत 92.8 रहा। पहले चरण में 93.19 प्रतिशत मतदान हुआ था। दोनों चरणों का औसत मतदान 92.47 प्रतिशत रहा, जो 2011 के 84.72 प्रतिशत के रिकॉर्ड से काफी अधिक है।अन्य एजेंसियों ने अलग-अलग अनुमान जारी किए हैं, लेकिन Axis My India ने साइलेंट वोटरों के कारण अपना एग्जिट पोल रोक दिया है। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि वोटर खुलकर सामने नहीं आए, जिससे सही निष्कर्ष निकालना मुश्किल हो गया।
साइलेंट वोटरों की बढ़ती भूमिका
प्रदीप गुप्ता के अनुसार, इस चुनाव में करीब 60 से 70 प्रतिशत मतदाताओं ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्होंने किस पार्टी को वोट दिया है। यह आंकड़ा बेहद असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर एग्जिट पोल के दौरान मतदाता अपनी पसंद साझा करते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद जब उनकी टीम फील्ड में लोगों से बातचीत करने पहुंची, तो बड़ी संख्या में लोगों ने जवाब देने से मना कर दिया। Axis My India आमतौर पर फेस-टू-फेस इंटरव्यू के जरिए डेटा एकत्र करती है, जिसे काफी विश्वसनीय माना जाता है। लेकिन इस बार पर्याप्त प्रतिनिधित्व वाला सैंपल नहीं मिल पाने के कारण एजेंसी ने एग्जिट पोल जारी न करने का फैसला लिया।
रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई दिलचस्पी
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में मतदान प्रतिशत ने भी सभी का ध्यान खींचा है। दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 92.8 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा न केवल प्रभावशाली है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महिला मतदाता इस बार चुनाव में बेहद सक्रिय रही हैं।
पहले चरण में भी 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। यदि दोनों चरणों का औसत देखा जाए तो यह 92.47 प्रतिशत बैठता है, जो 2011 के 84.72 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड से काफी अधिक है। इतना अधिक मतदान यह संकेत देता है कि जनता में चुनाव को लेकर जबरदस्त उत्साह है और लोग बड़ी संख्या में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं।
