नई दिल्ली: वर्ष 2026 में खरीफ सीजन किसानों के लिए कई चुनौतियां लेकर आया है। एल नीनो के संभावित प्रभाव से कमजोर मानसून, अनियमित वर्षा, लंबे सूखे अंतराल और बढ़े हुए तापमान की आशंका है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण यूरिया समेत उर्वरकों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है। खरीफ सीजन में देश को लगभग 18 से 19.4 मिलियन टन यूरिया की जरूरत होती है, जबकि शुरुआती स्टॉक सीमित है।
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसका भारत में कम बारिश, देर से मानसून और फसलों की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में पानी की कमी का रूप लेने की संभावना है। इससे पौधों का विकास प्रभावित होता है, पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो जाता है और उपज घट सकती है।
इस संबंध में बता दें कि, ऐसी स्थिति में Zydex की Zytonic Technology आधारित Zytonic Suraksha और Zytonic Mini Kit को प्रभावी विकल्प बताया जा रहा है। Zytonic Suraksha पौधों की पत्तियों पर सूक्ष्म सुरक्षात्मक परत बनाता है, जिससे रात की ओस अधिक समय तक पत्तियों पर बनी रहती है। इससे पौधों को अतिरिक्त नमी मिलती है और प्रकाश संश्लेषण बेहतर होता है। यह गर्मी और जल तनाव में पौधों को सहनशक्ति प्रदान करता है।
Zytonic Mini Kit में माइकोराइजा, NPK Consortia और Zinc Solubilizing Bacteria को 5:2:1 अनुपात में शामिल किया गया है। यह 8 किलो की किट एक एकड़ के लिए है। यह मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों को सक्रिय कर पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाता है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है। विशेष रूप से कम नमी की स्थिति में यह फसलों को बेहतर सहारा दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक प्रबंधन और समय पर सही निर्णयों के माध्यम से किसान इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। मौसम चाहे जितना अनिश्चित क्यों न हो, बेहतर योजना, नवाचार और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से फसलों को सुरक्षित रखते हुए उत्पादन और आय को बनाए रखा जा सकता है।
