नई दिल्ली।फसल की अच्छी पैदावार के लिए खेत की मिट्टी का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। कई बार किसान खेतों में महंगी खाद और दवाइयां डालते हैं, लेकिन फसल अच्छी नहीं होती। इसका मुख्य कारण यह है कि उन्हें मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी का पता नहीं होता। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना चलाती है। इसके तहत किसान मुफ्त में अपने खेत की मिट्टी की जांच करवा सकते हैं।
यहां यह बताते चसले कि, सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए कई जगहें तय की हैं जहां मुफ्त या बेहद मामूली फीस पर जांच होती है। हर जिले में कृषि विज्ञान केंद्र होता है, जहां मिट्टी की जांच के लिए सरकारी लैब बनी होती है। किसान अपने ब्लॉक या जिले के कृषि अधिकारी से मिलकर भी मिट्टी का सैंपल जमा कर सकते हैं। Soil Health Card Portal पर जाकर नजदीकी जांच केंद्र का पता भी लगाया जा सकता है।
मिट्टी की जांच क्यों है जरूरी?
मिट्टी की जांच से यह पता चलता है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता कितनी है। यदि किसी पोषक तत्व की कमी होती है तो उसी के अनुसार उर्वरकों का चयन किया जा सकता है।
इससे किसानों को कई लाभ मिलते हैं—
- अनावश्यक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होता है।
- संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग किया जा सकता है।
- मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
- फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार की संभावना बढ़ती है।
- लंबे समय तक भूमि की उत्पादक क्षमता सुरक्षित रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जांच के लगातार एक ही प्रकार के उर्वरकों का उपयोग करने से मिट्टी का पोषण संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय-समय पर मिट्टी की जांच कराना लाभदायक माना जाता है।
आखिर में बताते चले कि, मिट्टी की जांच सही हो, इसके लिए खेत से सैंपल सही तरीके से लेना जरूरी है। खेत के बीच में से 4 से 5 अलग-अलग जगहों से मिट्टी उठानी चाहिए। पेड़ के नीचे, नाली के पास या खाद के ढेर के पास से मिट्टी नहीं लेनी चाहिए। जहां से मिट्टी लेनी हो, वहां खुरपी या फावड़े से वी आकार का करीब 6 इंच गहरा गड्ढा बनाएं। फिर गड्ढे की परत के ऊपर से नीचे तक एक सेंटीमीटर मोटी मिट्टी की परत काटकर निकालें। सभी जगहों की मिट्टी को प्लास्टिक के टब में मिलाकर कंकड़-पत्थर निकाल दें और छांव में सुखा लें। करीब आधा किलो मिट्टी साफ कपड़े या प्लास्टिक की थैली में डालें। थैली पर कागज की पर्ची चिपकाकर अपना मोबाइल नंबर, पता और खेत का खसरा नंबर लिख दें। इस सैंपल को नजदीकी कृषि केंद्र में जमा कर दें। कुछ दिनों बाद मिट्टी की रिपोर्ट आ जाएगी, जिससे पता चल जाएगा कि खेत को किस खाद की जरूरत है।
