सूरत। भारत का पहला बैरियर-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम गुजरात के सूरत में NH-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा (कामरेज टोल प्लाजा) पर शुरू हो गया है। इस प्रणाली के शुरू होने से वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने या लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।नई व्यवस्था में वाहन हाईवे की सामान्य गति से गुजरते हुए टोल का भुगतान कर सकेंगे। यह सिस्टम आरएफआईडी और एएनपीआर कैमरा तकनीक पर आधारित है, जो FASTag अकाउंट से स्वचालित रूप से टोल काट लेगा। चोर्यासी टोल प्लाजा सूरत से भरूच की व्यस्त खंड पर स्थित है।
इससे पहले फरवरी 2026 में इस पायलट प्रोजेक्ट का ट्रायल शुरू किया गया था। अब इसे पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है। इस व्यवस्था से टोल प्लाजा पर यातायात सुचारू रहेगा और समय की बचत होगी।सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में अन्य हाईवे पर भी बैरियरलेस टोल सिस्टम लागू किया जाए। चोर्यासी टोल प्लाजा पश्चिम भारत के व्यस्ततम गलियारों में से एक है, जहां इस नई तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है।यह जानकारी 1 मई 2026 तक उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है।
कैसे काम करता है MLFF टोल सिस्टम
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम अत्याधुनिक तकनीकों जैसे आरएफआईडी (RFID) और एएनपीआर (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों पर आधारित है। हर वाहन पर लगे FASTag के माध्यम से टोल की राशि स्वतः ही संबंधित बैंक खाते या वॉलेट से कट जाएगी। जैसे ही वाहन टोल प्लाजा के नीचे से गुजरता है, वहां लगे सेंसर और कैमरे वाहन की पहचान कर लेते हैं और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के भुगतान प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
यदि किसी वाहन में FASTag नहीं है या वह सक्रिय नहीं है, तो एएनपीआर कैमरा वाहन के नंबर प्लेट को पहचानकर संबंधित मालिक को बाद में भुगतान का नोटिस भेज सकता है। इससे टोल चोरी पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
यात्रियों को होंगे कई लाभ
नई टोलिंग व्यवस्था के लागू होने से वाहन चालकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब उन्हें टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा, लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी।
ईंधन की बचत भी इस प्रणाली का एक बड़ा लाभ है। पहले जहां वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना और फिर दोबारा गति पकड़नी पड़ती थी, जिससे अधिक ईंधन खर्च होता था, वहीं अब निरंतर गति से यात्रा करने के कारण ईंधन की खपत कम होगी। इससे न केवल वाहन चालकों की लागत घटेगी, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।
सूरत के चोर्यासी टोल प्लाजा पर शुरू हुआ बैरियरलेस टोलिंग सिस्टम भारत के सड़क परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है। यह न केवल यात्रा को आसान और तेज बनाएगा, बल्कि डिजिटल और स्मार्ट इंडिया के सपने को भी साकार करने में मदद करेगा। आने वाले समय में यदि यह मॉडल पूरे देश में लागू होता है, तो भारतीय हाईवे सिस्टम में एक नई क्रांति देखने को मिल सकती है।
