नई दिल्ली। शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रही तो अगले 3 से 4 महीनों में ईंधन की कीमतों में और इजाफा हो सकता है।यह बढ़ोतरी करीब 4 साल बाद हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावट की चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें 90-100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहने पर पेट्रोल-डीजल कीमतों में आगे बढ़ोतरी की संभावना है।
मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज के गुरमीत सिंह चावला ने कहा कि तेल कंपनियां हाई एनर्जी प्राइस का बोझ उठा रही हैं। चॉइस के धवल पोपट के अनुसार, मौजूदा 3 रुपये की बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को आंशिक राहत मिली है, लेकिन घाटे की भरपाई के लिए कुल 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। प्रति लीटर 1 रुपये बढ़ोतरी से कंपनियों के EBITDA में 15,000-16,000 करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है, जिससे घरेलू ईंधन कीमतें वैश्विक घटनाओं के प्रति संवेदनशील हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की लगातार मजबूती से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रहेगा।
