नोएडा: संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो का नया चरण शुरू होने से भारत का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ सकता है। इससे बारिश पर निर्भर खरीफ फसलों, खासकर धान और मक्का की खेती पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। FAO के अनुसार, इस बार का अल नीनो पिछले की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकता है।FAO ने कहा कि यदि मॉनसून सामान्य से कमजोर रहा तो किसानों को फसलों की सिंचाई और उत्पादन में दिक्कतें आएंगी। इससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। संस्था ने 41 वर्षों के सैटेलाइट आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह चेतावनी जारी की है।
एशिया के कई देशों में सूखे का जोखिम
FAO के मुताबिक, कृषि सूखे का खतरा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में बढ़ सकता है। इनमें भारत, पाकिस्तान, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं।2015-16 के अल नीनो के दौरान भारत में मक्का उत्पादन में करीब 4 प्रतिशत और धान उत्पादन में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। दक्षिण-पूर्व एशिया में उस समय लगभग 1.5 करोड़ टन चावल का नुकसान हुआ था। FAO के प्राकृतिक संसाधन अधिकारी जॉर्ज अल्वार-बेल्ट्रान ने कहा कि बारिश कम होने पर सबसे पहले खेती प्रभावित होती है, जिससे किसानों की आजीविका संकट में पड़ जाती है।
क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ जाती है चिंता?
अल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के समुद्री जल के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण उत्पन्न होती है। इसका प्रभाव केवल समुद्री क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौसम के स्वरूप को बदल देता है।
भारत में अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर मॉनसून से जोड़ा जाता है। हालांकि हर बार इसका प्रभाव समान नहीं होता, लेकिन इतिहास बताता है कि कई वर्षों में अल नीनो की स्थिति के दौरान वर्षा में कमी दर्ज की गई है। यही कारण है कि जब भी अल नीनो सक्रिय होने की संभावना बनती है, कृषि क्षेत्र और मौसम वैज्ञानिक विशेष सतर्कता बरतते हैं।
अंत में यह बता दें कि, FAO की चेतावनी इस बात का संकेत है कि बदलते जलवायु पैटर्न के बीच कृषि क्षेत्र को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने की आवश्यकता है। आने वाले महीनों में मॉनसून की स्थिति पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इसकी दिशा और तीव्रता ही यह तय करेगी कि अल नीनो का वास्तविक प्रभाव कितना व्यापक होगा। फिलहाल विशेषज्ञों ने सतर्क रहने और कृषि प्रबंधन की बेहतर रणनीतियां अपनाने की सलाह दी है ताकि संभावित जोखिमों को कम किया जा सके।
