नई दिल्ली। धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद शुक्रवार को एक नया घटनाक्रम सामने आया। प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच गुरुवार देर रात हुई चर्चा के बाद भोजशाला परिसर की पिछली बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की जमीन पर जुमे की नमाज अदा करने पर सहमति बनी। इसके बाद प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और पुलिस बल के साथ बैरिकेडिंग कराई।
इस संबंध में आपको बताते चले कि, शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ से दो बजे के बीच मुस्लिम समाज के लोग नमाज के लिए निर्धारित स्थल पर पहुंचे। बारिश के कारण जमीन गीली होने पर वहां तिरपाल बिछाई गई। शुरुआत में करीब 10 से 15 लोग जुमे की नमाज अदा करने पहुंचे। धीरे-धीरे नमाजियों का सिलसिला बढ़ते-बढ़ते 100 से ऊपर पहुंच गया। कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी के सदर अब्दुल समद एवं याचिकाकर्ता भी नमाज पढ़ने स्थल पर पहुंचे।नमाज के लिए तय किए गए स्थल को लेकर स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। भोजशाला के पीछे रहने वाले रहवासियों का दावा है कि यह जमीन निजी कृषि भूमि है और उसका स्वामित्व उनका है। उनका कहना है कि इस जमीन पर नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार सुबह कुछ स्थानीय लोग जमीन के आसपास एकत्रित हुए और अपनी आपत्ति प्रशासन के सामने रखी।
वही पूरे घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भोजशाला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। दोनों पक्षों के आवागमन के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। बारिश के कारण नमाज स्थल की जमीन गीली होने पर प्रशासन की ओर से तिरपाल आदि की व्यवस्था कराई गई। इस दौरान प्रशासन ने क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को अपने पक्ष में बताते हुए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनकी नजर 5 अगस्त को प्रस्तावित अगली सुनवाई पर है।
दोपहर में पहुंचे नमाजी, बारिश के कारण बिछाई गई तिरपाल
शुक्रवार दोपहर लगभग डेढ़ से दो बजे के बीच मुस्लिम समाज के लोग निर्धारित स्थल पर पहुंचने लगे। लगातार बारिश के कारण जमीन गीली थी, इसलिए प्रशासन की ओर से वहां तिरपाल बिछाने की व्यवस्था की गई, जिससे लोग सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से नमाज अदा कर सकें।
शुरुआत में लगभग 10 से 15 लोग नमाज के लिए पहुंचे। इसके बाद धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ती गई और नमाजियों की संख्या 100 से अधिक हो गई। इस दौरान कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद और मामले से जुड़े एक याचिकाकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे।
स्थानीय लोगों ने जताई आपत्ति
नमाज के लिए निर्धारित स्थान को लेकर स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई। भोजशाला के पीछे रहने वाले कुछ निवासियों का कहना है कि खसरा नंबर 612 की भूमि निजी कृषि भूमि है और उसका स्वामित्व उनके पास है। उनका दावा है कि इस भूमि पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
शुक्रवार सुबह कुछ स्थानीय लोग संबंधित भूमि के पास एकत्र हुए और प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां रखीं। उन्होंने मांग की कि भूमि के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं पर विधिक प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाए।
फिलहाल शुक्रवार को जुमे की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहीं। अब इस संवेदनशील मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 5 अगस्त की सुनवाई होगी, जहां सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे। न्यायालय के आगामी निर्देशों के बाद ही इस विवाद की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
