अयोध्या: श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर गुरुवार को अयोध्या की रामजन्मभूमि कोतवाली में FIR दर्ज की गई है। यह इस प्रकरण में पहली बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। FIR में 8 लोगों के नाम शामिल हैं, जबकि अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।FIR में अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव नाम शामिल हैं। इन पर BNS की धारा 306, 316, 317 और 61 के तहत गबन, धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
FIR दर्ज होने पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सबूत मिटाए जाने की आशंका जताई, जबकि VHP के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने संतोष व्यक्त किया। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि SIT ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है और सरकार विधिसंगत कार्रवाई करेगी।आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि चोर कितना भी शातिर हो, एक दिन पकड़ा जाता है। उन्होंने भगवान राम के मंदिर में चोरी करने वाले अपराधियों की निंदा की।
किन लोगों को बनाया गया आरोपी
दर्ज एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है, उनमें अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।
इनके अलावा कुछ अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316, 317 और 61 के तहत दर्ज की गई है। इन धाराओं के अंतर्गत गबन, धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
पुलिस अब दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित गड़बड़ी किस प्रकार हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।राम मंदिर देश की आस्था और श्रद्धा का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी वित्तीय विवाद या कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले की जांच पुलिस और संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप किस सीमा तक सही हैं और किन लोगों की क्या भूमिका रही। फिलहाल सभी आरोपी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा मामले में अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।
