नई दिल्ली। केंद्र सरकार व्हाट्सएप और टेलीग्राम द्वारा यूजरनेम आधारित मैसेजिंग सुविधाओं पर दी गई प्रतिक्रियाओं की जांच कर रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कोई भी नियामक ढांचा सभी प्लेटफॉर्मों पर समान रूप से लागू होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने सोमवार को एक साइबर सुरक्षा रिपोर्ट के लॉन्च के मौके पर कहा कि मंत्रालय को व्हाट्सएप की प्रतिक्रिया मिली थी। उत्तर पिछले सप्ताह प्राप्त हुआ था और इसकी समीक्षा की जा रही है। यदि कोई कार्रवाई हुई तो जांच के बाद ही की जाएगी।
सरकार ने पहले व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल को नोटिस जारी कर चिंता जताई थी कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग, जो फोन नंबर का खुलासा किए बिना संवाद की अनुमति देता है, पहचान की चोरी, फिशिंग और डिजिटल गिरफ्तारी को आसान बना सकता है। सरकार ने इन प्रणालियों में निर्मित सुरक्षा उपायों का विवरण मांगा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सभी प्लेटफॉर्मों पर यूजरनेम आधारित संदेश के लिए सामान्य मानकों की दिशा में काम कर रहा है। टेलीग्राम ने लंबे समय से यह सुविधा दी हुई है, जबकि व्हाट्सएप ने भारत में अभी इसे शुरू नहीं किया है। व्हाट्सएप का कहना है कि यूजरनेम फोन नंबर की जगह नहीं लेते और यह अतिरिक्त गोपनीयता सुविधा है।
सरकार ने क्यों जताई चिंता?
केंद्र सरकार ने इससे पहले व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल को नोटिस जारी कर यूजरनेम आधारित मैसेजिंग सिस्टम को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे। सरकार की मुख्य चिंता यह है कि यदि कोई व्यक्ति केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सके और उसका मोबाइल नंबर सामने न आए, तो साइबर अपराधियों के लिए नकली पहचान बनाकर लोगों को निशाना बनाना आसान हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की व्यवस्था का गलत इस्तेमाल निम्नलिखित साइबर अपराधों में हो सकता है—
- पहचान की चोरी (Identity Theft)
- फिशिंग (Phishing)
- डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले
- फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को भ्रमित करना
- वित्तीय धोखाधड़ी और सोशल इंजीनियरिंग
इसी कारण सरकार ने कंपनियों से यह जानकारी भी मांगी है कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसे कौन-कौन से सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, जो इन संभावित जोखिमों को कम कर सकें।
यूजरनेम आधारित मैसेजिंग डिजिटल गोपनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक उपयोगी सुविधा मानी जा सकती है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी जुड़े हुए हैं। केंद्र सरकार का उद्देश्य इस तकनीक पर रोक लगाना नहीं, बल्कि इसे सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से लागू करना है। आने वाले समय में यदि नए नियम लागू होते हैं, तो उनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता बनाए रखते हुए साइबर अपराधों की संभावनाओं को कम करना होगा। फिलहाल सभी की नजर सरकार की समीक्षा प्रक्रिया और संभावित नियामकीय फैसलों पर बनी हुई है।
