नई दिल्ली। खेती में सिंचाई बेहद जरूरी है। कई किसान अभी भी पारंपरिक तरीकों से सिंचाई करते हैं, लेकिन गिरते जल स्तर के कारण यह मुश्किल हो रहा है। खुले खेतों में पानी बहाने से लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है और खाद व बिजली की भी भारी खपत होती है। माइक्रो इरिगेशन यानी ड्रिप सिंचाई तकनीक पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद पानी और खाद पहुंचाती है। इससे पानी की बचत के साथ फसल की क्वालिटी और पैदावार में सुधार होता है।
इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, ड्रिप सिंचाई में पाइप्स के जरिए पानी और घुलने वाली खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचती है। इससे खेत में पानी बेवजह बर्बाद नहीं होता और खरपतवार भी नहीं उगती। कृषि जानकारों के मुताबिक इस सिस्टम से तकरीबन 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत हो सकती है। बिजली की खपत कम होती है और खाद व कीटनाशक पर खर्च भी घट जाता है। कई फसलों में उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक का इजाफा देखने को मिलता है।
जानकारी देते चले कि, सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और पर ड्रॉप मोर क्रॉप अभियान के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर कुल लागत का करीब 80 से 90 प्रतिशत तक खर्च उठाती है। अगर सिस्टम लगाने का खर्च 1 से 1.5 लाख रुपये आता है तो छोटे और सीमांत किसानों को सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत रकम ही देनी पड़ती है। बाकी राशि सरकार मंजूर कंपनी को सीधे भेज देती है। बड़े किसानों को भी 75 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है।
अंत में बता दे कि, इस योजना का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर और जमीन से जुड़े दस्तावेज जैसे खसरा या खतौनी जरूरी हैं। किसान अपने राज्य के उद्यानिकी विभाग या कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन दिक्कत होने पर नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या जिला उद्यानिकी कार्यालय में भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। आवेदन के बाद अधिकारी खेत का निरीक्षण करते हैं। मंजूरी मिलने पर अधिकृत कंपनी सिस्टम लगाती है और तय नियमों के अनुसार सब्सिडी जारी कर दी जाती है।
