कोलकाता। बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस नेता आशीष बनर्जी का रविवार सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट शहर स्थित पार्टी कार्यालय में शव फंदे से लटका मिला। पुलिस को मौके से एक पन्ने का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने लिखा कि राजनीति में आना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी।
यहां हम आपको बताते चले कि, सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं बताया। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे भविष्य में कभी राजनीति में न आएं और अपने-अपने पेशों पर ध्यान दें। नोट में उन्होंने तारापीठ रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (टीआरडीए) का जिक्र करते हुए लिखा कि उनके पास वहां कोई सीधे तौर पर जिम्मेदारी या अधिकार नहीं थे। वे केवल बैठकों में शामिल होते थे। टेंडर कमेटी, चेक साइन करने, किसी प्लान को मंजूरी देने या एनओसी जारी करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और न ही इन मामलों में उनसे सलाह ली जाती थी। इसके बावजूद उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों में घसीटने और बदनाम करने की कोशिश की गई।
जानकारी दे दें कि, पेशे से शिक्षक रहे आशीष बनर्जी 2001 से 2026 तक लगातार रामपुरहाट सीट से विधायक रहे। उन्होंने ममता बनर्जी के शासनकाल में स्कूली शिक्षा मंत्री, कृषि मंत्री और डिप्टी स्पीकर पद की जिम्मेदारी संभाली थी। नोट में उन्होंने अपने साफ-सुथरे करियर का हवाला देते हुए लिखा कि उन्होंने जीवन भर एक पैसा भी गलत तरीके से नहीं लिया और हमेशा बिना फीस के छात्रों को पढ़ाया। उन्होंने कहा कि वे कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे, फिर भी उन्हें अपमानित किया गया।
सुसाइड नोट में टीआरडीए का भी जिक्र
आशीष बनर्जी के कथित सुसाइड नोट में तारापीठ रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी टीआरडीए का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है। नोट में उन्होंने दावा किया कि इस संस्था में उनके पास सीधे तौर पर कोई जिम्मेदारी या अधिकार नहीं था। उनके अनुसार, वह केवल बैठकों में हिस्सा लेते थे और संस्था से जुड़े प्रशासनिक या वित्तीय निर्णय लेने में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।
उन्होंने अपने नोट में स्पष्ट किया कि टेंडर कमेटी, चेक पर हस्ताक्षर करने, किसी योजना को मंजूरी देने या एनओसी जारी करने जैसे मामलों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी लिखा कि इन मामलों में उनसे सलाह तक नहीं ली जाती थी। इसके बावजूद, उनके अनुसार, उन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में घसीटने और सार्वजनिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की गई।
‘जीवन भर गलत तरीके से एक पैसा नहीं लिया’
कथित नोट में आशीष बनर्जी ने अपने साफ-सुथरे करियर का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी गलत तरीके से एक पैसा नहीं लिया। उन्होंने यह भी लिखा कि शिक्षक के रूप में उन्होंने हमेशा बिना फीस लिए छात्रों को पढ़ाया।
गौरतलब हैं कि, उनका कहना था कि उन्होंने अपने सार्वजनिक और निजी जीवन में ईमानदारी बनाए रखने की कोशिश की और कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे। इसके बावजूद उनके खिलाफ आरोप लगाए गए और उन्हें अपमानित किया गया। नोट में लिखी इन बातों से यह संकेत मिलता है कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों और सार्वजनिक छवि को लेकर बेहद व्यथित थे। हालांकि, उनके मानसिक और व्यक्तिगत हालात के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
