कई बार किसानों और घर में बागवानी करने वालों को यह समस्या दिखती है कि पौधे में फूल तो खूब आते हैं, लेकिन वे फल में नहीं बदल पाते। फूल आने के कुछ दिन बाद ही झड़ जाते हैं या सूख जाते हैं, जिससे पैदावार नहीं मिल पाती। इसके पीछे पोषक तत्वों की कमी, परागण न होना या मौसम की गड़बड़ी जैसी वजहें हो सकती हैं।फूल से फल बनने के लिए पौधे को सही मात्रा में पोषक तत्व चाहिए होते हैं। अगर मिट्टी में फास्फोरस और पोटाश की कमी हो तो फूल तो आ जाते हैं लेकिन वे फल बनने से पहले ही झड़ जाते हैं। सिर्फ नाइट्रोजन वाली खाद ज्यादा मात्रा में देने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन फूल कमजोर रह जाते हैं और फल नहीं बन पाते। बोरॉन और जिंक जैसे छोटे तत्वों की कमी से भी फूल झड़ने लगते हैं। इसलिए फूल आने के समय ऐसी खाद देनी चाहिए जिसमें फास्फोरस और पोटाश की मात्रा ज्यादा हो तथा संतुलित खाद का इस्तेमाल जरूरी है।
फूल से फल बनने के लिए परागण होना बहुत जरूरी है, यानी फूल के नर भाग से पराग कण मादा भाग तक पहुंचना चाहिए। यह काम ज्यादातर मधुमक्खियां, तितलियां और हवा करती हैं। खेत के आसपास कीटनाशक का ज्यादा छिड़काव करने से मधुमक्खियां और दूसरे कीड़े कम आते हैं, जिससे परागण ठीक से नहीं हो पाता और फूल बिना फल बने ही गिर जाते हैं। बहुत ज्यादा गर्म, ठंडा या नमी वाला मौसम भी परागण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। फूल आने के समय जरूरत से ज्यादा कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए।फूल आने के समय पौधे को पानी की सही मात्रा मिलना भी जरूरी होता है। पानी की कमी होने पर फूल झड़ने लगते हैं, जबकि बहुत ज्यादा पानी देने से जड़ों को नुकसान होता है जिसका असर फूल और फल दोनों पर पड़ता है। तेज गर्मी या अचानक ठंड पड़ने से भी फूल कमजोर होकर गिर जाते हैं। इसलिए मौसम के हिसाब से पानी की मात्रा तय करनी चाहिए और फूल आने के समय पौधे पर खास ध्यान देना चाहिए।
फास्फोरस और पोटाश की कमी से हो सकती है परेशानी
पौधे में फूल आने और उसके बाद फल बनने के लिए पोषक तत्वों का संतुलित होना जरूरी है। खास तौर पर फास्फोरस और पोटाश पौधे के विकास और प्रजनन से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर मिट्टी में इन पोषक तत्वों की कमी है तो पौधे में फूल तो दिखाई दे सकते हैं, लेकिन फूलों का विकास सही तरीके से नहीं हो पाता और वे फल बनने से पहले झड़ सकते हैं।
फूल आने के समय पौधे को केवल एक ही पोषक तत्व देने के बजाय उसकी जरूरत के अनुसार संतुलित पोषण उपलब्ध कराना चाहिए। खेत की मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के आधार पर उर्वरक का चयन करना बेहतर रहता है। बिना जरूरत लगातार खाद डालने के बजाय मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर पोषक तत्वों का इस्तेमाल अधिक उचित तरीका है।
साथ ही फूल आने की अवस्था में अनावश्यक कीटनाशक छिड़काव से बचना चाहिए और खेत में मधुमक्खियों तथा अन्य उपयोगी परागण करने वाले कीटों की मौजूदगी को बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। सिंचाई भी जरूरत के अनुसार करनी चाहिए, क्योंकि पानी की कमी या अत्यधिक नमी दोनों पौधे की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, फूल आना अच्छी फसल की शुरुआत जरूर है, लेकिन फूल से फल बनने के लिए पोषण, परागण और अनुकूल मौसम तीनों का संतुलन जरूरी है। इसलिए फूल झड़ने की समस्या दिखाई देने पर केवल अधिक खाद डालने या बार-बार दवा छिड़कने के बजाय समस्या के वास्तविक कारण की पहचान करना चाहिए। मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर उचित प्रबंधन अपनाने से फल बनने की प्रक्रिया और संभावित उत्पादन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
