अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने सोमवार देर रात अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में चंपत राय का नाम नहीं है, जबकि अनिल मिश्रा का नाम शामिल है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पहले गठित एसआईटी की है।प्रदेश सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अनुरोध पर लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन 13 जून को किया था। इसमें लखनऊ के आईजी रेंज किरण एस. तथा विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था। इस दल ने 23 जून को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग संजय प्रसाद को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी और आगे की जांच के लिए सात दिन का समय मांगा था, जिसे शासन ने बढ़ा दिया था।
प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को अयोध्या में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें आठ नामजद और अन्य अज्ञात को आरोपी बनाया गया। ये सभी आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं। सोमवार को सरकार की ओर से बताया गया कि विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली एसआईटी की जांच रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंप दी गई है। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में की गई संस्तुतियों पर ही एफआईआर समेत अन्य कार्रवाई हुई है।
ट्रस्ट के अनुरोध पर हुआ था एसआईटी का गठन
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। यह एसआईटी लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनाई गई थी।
जांच दल में लखनऊ के आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था। इस टीम को मामले से जुड़े आरोपों, उपलब्ध तथ्यों और वित्तीय लेनदेन सहित संबंधित पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
एसआईटी ने जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, शिकायतों और अन्य संबंधित तथ्यों को देखा। इसके बाद टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग संजय प्रसाद को सौंपी थी।
प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई थी FIR
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को अयोध्या में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था, जबकि कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया।
मामले में नामजद किए गए सभी आरोपी फिलहाल जेल में बंद बताए जा रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति का एफआईआर में आरोपी होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के समान नहीं है। अंतिम रूप से दोष या निर्दोषता का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत के निर्णय के आधार पर होता है।
प्रारंभिक जांच में एसआईटी की जिन संस्तुतियों पर कार्रवाई की गई, उन्हीं के आधार पर एफआईआर समेत अन्य कदम उठाए गए थे। अब अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच के निष्कर्षों और उसमें किए गए उल्लेखों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय का नाम नहीं
मामले की अंतिम एसआईटी रिपोर्ट को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें चंपत राय का नाम नहीं है। चंपत राय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी हैं। ऐसे में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में उनका नाम नहीं होने की जानकारी मामले के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, अनिल मिश्रा का नाम रिपोर्ट में शामिल होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने के आधार और जांच के निष्कर्षों को कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाना आवश्यक होगा। केवल रिपोर्ट में नाम का उल्लेख किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
