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अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते की शर्तों में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर यानी करीब 25 लाख करोड़ रुपये के फंड और अमेरिकी कंपनियों के निवेश का प्रस्ताव शामिल है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक ईरानी अधिकारी ने इसे रीकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम बताया। उन्होंने कहा कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने पर ईरान को यह आर्थिक मदद दी जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम पर सहमति के करीब पहुंच गए हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उसके संवर्धित यूरेनियम को नष्ट किया जाएगा।हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी सूत्रों के हवाले से बताया कि समझौते के ड्राफ्ट में परमाणु सामग्री को नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है।

क्या है प्रस्तावित युद्धविराम समझौता?

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम को लेकर एक प्रारंभिक रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और आगे की कूटनीतिक वार्ताओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना बताया जा रहा है।

समझौते से जुड़ी चर्चाओं में आर्थिक सहयोग, निवेश और पुनर्निर्माण सहायता जैसे विषय प्रमुख रूप से सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित फंड का उपयोग ईरान के बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास और आर्थिक पुनर्बहाली के लिए किया जा सकता है। हालांकि अब तक किसी भी पक्ष ने अंतिम और आधिकारिक समझौते की पुष्टि नहीं की है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व

अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समझौते की चर्चा में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी प्रमुख रूप से सामने आता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी सूत्रों के हवाले से बताया कि समझौते के ड्राफ्ट में परमाणु सामग्री को नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है।

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