नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में बीजेपी हैट्रिक लगाने जा रही है। इस जीत में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा नॉर्थ-ईस्ट की राजनीति के ‘किंग’ साबित हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाने वाली इस सफलता की स्क्रिप्ट में दो शब्द सबसे ज्यादा गूंजे- ‘मामा’ और ‘मियां’।हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य की महिलाओं के बीच ‘मामा’ का इमोशनल कनेक्ट बनाया। ‘अरुणोदयी 2.0’ समेत कैश ट्रांसफर योजनाओं के जरिए सीधे महिलाओं के बैंक खातों में मदद पहुंचाई। चुनाव से पहले इन योजनाओं का दायरा बढ़ाया गया, जिससे ग्रामीण महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिला। इस अप्रोच ने उन्हें घर-घर का सदस्य बना दिया और महिलाओं के वोट बीजेपी की ओर मजबूती से गए।
‘मामा’ रणनीति: महिलाओं को साधने का मास्टरस्ट्रोक
हिमंत बिस्व सरमा ने ‘मामा’ की छवि बनाकर महिलाओं के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव स्थापित किया। इस रणनीति का आधार था ‘अरुणोदयी 2.0’ जैसी योजनाएं, जिनके तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सीधे बैंक खातों में सहायता राशि दी गई।
इस योजना के जरिए सरकार ने न केवल महिलाओं को आर्थिक मदद पहुंचाई, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा का एहसास भी कराया। चुनाव से पहले इस योजना का विस्तार किया गया, लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई गई और भुगतान की प्रक्रिया को तेज किया गया।
ग्रामीण इलाकों में इसका प्रभाव खास तौर पर देखने को मिला, जहां महिलाएं पहली बार सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ महसूस कर रही थीं। इससे बीजेपी को एक मजबूत महिला वोट बैंक मिला, जिसने चुनावी समीकरण को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।
अन्य प्रमुख योजनाएं और उनका असर
‘अरुणोदयी’ के अलावा भी हिमंत सरमा सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं। इनमें ‘ओरुनोदोई योजना’ के तहत गरीब परिवारों को नियमित आर्थिक सहायता, ‘स्वनिर्भर नारी’ योजना के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के अवसर, और ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास कार्यक्रम’ के जरिए गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, शिक्षा क्षेत्र में निवेश और सड़क एवं कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने भी जनता के बीच सरकार की सकारात्मक छवि बनाई।सरकार ने इन योजनाओं की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी। यही वजह रही कि सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) का असर सीमित रहा।
