नई दिल्ली। किसान अब आधुनिक किस्मों और तकनीकों का उपयोग कर बादाम की खेती कर सकते हैं। यह खेती ठंडे इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों में संभव है। ग्राफ्टेड पौधों को चुनने से पौधों में रोग कम लगते हैं और फल जल्दी आने शुरू हो जाते हैं।
बादाम के पेड़ों पर आमतौर पर जनवरी-फरवरी के आसपास फूल आने शुरू होते हैं। फसल अगस्त-सितंबर तक पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, यानी लगभग 7 महीने में किसानों को अपनी मेहनत का फल मिल जाता है। एक स्वस्थ परिपक्व पेड़ से सालाना 15 से 25 किलोग्राम बादाम की उपज मिल सकती है।
खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त है। मिट्टी परीक्षण कराकर जैविक खाद और जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करें, जिससे फल का आकार और मिठास बढ़े। ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाएं, ताकि जड़ें नम रहें लेकिन पानी जमा न हो और फंगल रोग का खतरा कम रहे। गर्मियों में मल्चिंग से मिट्टी की नमी बनी रहती है।
प्रत्येक मौसम में मिट्टी परीक्षण कर उर्वरक की सही मात्रा तय करें। मौसम शुरू होने पर उचित छंटाई और उर्वरक प्रबंधन से ए-ग्रेड क्वालिटी का फल प्राप्त होता है। पौधों के बीच उचित दूरी रखें ताकि पर्याप्त धूप और हवा मिल सके। किसान थोक विक्रेताओं या ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट से सीधा संपर्क कर कमीशन बचाकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
