बहराइच। बहराइच जिले के टिकुरी गांव के किसान दुर्गेश कुमार सिंह पिछले 10 साल से गन्ने की खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर गन्ने की बुवाई के बाद देखभाल, लागत-मुनाफा और बीमारियों से बचाव से जुड़ी जानकारी साझा की है। गन्ने की अच्छी पैदावार और मुनाफे के लिए फसल की सही देखभाल जरूरी होती है।बुवाई के बाद खेत में नमी बनाए रखना आवश्यक है। जमाव शुरू होने पर समय-समय पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए ताकि पौधों का विकास तेजी से हो। खेत में खरपतवार न उगने दें क्योंकि इससे मिट्टी की ताकत खत्म हो जाती है। समय पर निराई-गुड़ाई करने से जड़ों को हवा मिलती है और गन्ना मजबूत होता है।
यहां यह जानकारी देते चले कि, एक बीघा गन्ने की खेती में बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और कटाई मिलाकर लगभग 10,000 से 12,000 रुपये खर्च आता है। सही देखरेख से एक बीघे में 80 से 100 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है। बाजार या मिल के रेट के हिसाब से बेचने पर 30,000 से 35,000 रुपये आमदनी होती है। लागत निकालकर प्रति बीघा करीब 20,000 से 25,000 रुपये शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है।गन्ने में मुख्य रूप से लाल सड़न रोग और तना छेदक सूंडी का असर होता है। लाल सड़न में तना अंदर से लाल हो जाता है और पौधा सूखने लगता है। बचाव के लिए बीमारी-रहित स्वस्थ बीज बोएं और बुवाई से पहले बीज का शोधन करें। शुरुआती दौर में कीटों से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से कीटनाशक दवा का छिड़काव करें। जरूरत पड़ने पर कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी ली जा सकती है।बरसात में खेतों में जलभराव की समस्या होती है। ज्यादा दिनों तक पानी रुकने पर जड़ें गलने लगती हैं और फसल कमजोर पड़ जाती है। तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करें। बारिश के बाद धूप निकलने और पानी निकलने पर जड़ों के पास हल्की यूरिया या जिंक का छिड़काव करें ताकि फसल में फिर से हरियाली आ सके।
कृषि विज्ञान केंद्र से लें विशेषज्ञों की सलाह
दुर्गेश कुमार सिंह का कहना है कि यदि किसानों को फसल में किसी भी प्रकार की बीमारी, कीट या पोषण संबंधी समस्या दिखाई दे, तो उन्हें नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार समय पर उपचार करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है
वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय
गन्ना किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन बेहतर उत्पादन के लिए केवल खेती करना पर्याप्त नहीं है। समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, स्वस्थ बीज का उपयोग और रोग-कीटों की नियमित निगरानी जैसे उपाय अपनाकर उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
बहराइच के किसान दुर्गेश कुमार सिंह का अनुभव यह दर्शाता है कि सही तकनीक, नियमित देखभाल और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के साथ गन्ने की खेती किसानों के लिए लाभदायक व्यवसाय बन सकती है। हालांकि खेती से मिलने वाला वास्तविक उत्पादन और मुनाफा स्थानीय मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता, बाजार भाव और कृषि प्रबंधन पर निर्भर करेगा। इसलिए किसानों को स्थानीय कृषि अधिकारियों द्वारा जारी नवीनतम सलाह का पालन करते हुए खेती करना चाहिए।
