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नई दिल्ली।भारत विविधताओं का देश है, जहां हर त्योहार अपने साथ सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व लेकर आता है। इन्हीं प्रमुख पर्वों में से एक है बैसाखी, जिसे पूरे देश में विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हर साल की तरह इस बार भी बैसाखी की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि यह पर्व 13 अप्रैल को मनाया जाएगा या 14 अप्रैल को। आइए इस कन्फ्यूजन को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं इस पर्व का वास्तविक महत्व।

बैसाखी की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है क्योंकि सिख धर्म के अनुसार, 13 अप्रैल 1699 को गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। हालांकि, पर्व हर वर्ष मेष संक्रांति के दिन मनाया जाता है, जो 2026 में 14 अप्रैल को पड़ रहा है।बैसाखी का महत्व हिंदू परंपरा में रबी फसल की कटाई और नए वर्ष की शुरुआत से जुड़ा है। किसान इस दिन फसल के लिए प्रभु को धन्यवाद देते हैं और फसल का कुछ हिस्सा अर्पित करते हैं। सिख धर्म में यह खालसा पंथ स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।14 अप्रैल को सूर्योदय 05:57 बजे और सूर्यास्त 06:46 बजे होगा। इस पर्व पर प्रातःकाल उठकर स्नान, पूजा और दान करने की परंपरा है।

बैसाखी 2026 की सही तारीख क्या है?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, बैसाखी का पर्व हर वर्ष मेष संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इस दिन सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। वर्ष 2026 में सूर्य का यह गोचर 14 अप्रैल को प्रातः 09 बजकर 38 मिनट पर होगा। यही कारण है कि इस वर्ष बैसाखी का पर्व 14 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा।

हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि बैसाखी अक्सर 13 अप्रैल को भी क्यों मनाई जाती है। इसका कारण ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों है, जिसे समझना आवश्यक है।

बैसाखी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

बैसाखी का पर्व केवल सिख समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म में भी विशेष महत्व रखता है। यह दिन नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, खासकर उत्तर भारत में।

हिंदू परंपरा के अनुसार, यह समय रबी फसल की कटाई का होता है। किसान अपनी मेहनत की फसल को काटकर भगवान का आभार व्यक्त करते हैं। वे अपनी उपज का एक हिस्सा ईश्वर को अर्पित करते हैं और खुशहाली की कामना करते हैं।

वहीं सिख धर्म में बैसाखी को खालसा पंथ स्थापना दिवस के रूप में बड़े गर्व और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, लंगर और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

बैसाखी का पर्व भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का एक सुंदर संगम है। 2026 में यह पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा, क्योंकि इसी दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा। 13 अप्रैल का महत्व ऐतिहासिक रूप से जुड़ा है, लेकिन पर्व की वास्तविक तिथि ज्योतिषीय गणना के आधार पर निर्धारित होती है।

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